तस्वीर में: विस्फोट के बाद घटनास्थल पर पहुंची डॉक्टरों की टीम।
लखनऊ. आखों में आंसू और लड़खड़ाती जुबान, थरथराते पैर और चीख-पुकार। चारों ओर गमगीन महौल और डॉक्टर से जान बचाने की भीख मांगते घायलों के परिजन। शनिवार को कुछ यही नजारा देखने को मिला ट्रॉमा सेंटर में।
बताते चलें कि शनिवार की सुबह मोहनलालगंज थानाक्षेत्र के सिसेंडी गांव में पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट से दर्जनों लोग घायल हो गए, जबकि छह लोग मौत के आगोश में समा गए। इस दर्दनाक विस्फोट में बुरी तरह से झुलसे घायलों को ट्रॉमा सेंटर में लाया गया। इसके बाद अस्पताल में चारों ओर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। परिजनों का तांता लगने लगा। जहां नजर घुमाओ वहां घायलों के परिजन रोते-बिलखते दिखाई दिए। हर कोई डॉक्टर से घायलों को बचाने के लिए गिड़गिड़ाता दिखाई दिया।
पंखे की हवा से भड़की चिंगारी
पटाखा फैक्ट्री के मालिक खलील के भाई जलील, जिसका इलाज सिविल अस्पताल में चल रहा है। उसने बताया कि सुबह आठ बजे करीब 13 लोग र्मिची टाफी बम बना रहे थे। सभी लोगों से चार से पांच के ग्रुप में अलग-अलग जगह पर बांधने रहे थे। इसी दौरान गर्मी से बचने के लिए पंखा चलाते ही उससे एक चिंगारी निकली, जिसने पूरा दृश्य ही बदल दिया।
मात्र 150 और 80 रुपए के लिए दांव पर लगाते थे जान
गांव के ही रहने वाले युसूफ ने बताया कि पटाखा फैकट्री में काम करने की एवज में महिलाओं को 80 रुपए और पुरुषों को 150 रुपए मजदूरी मिलती है। इतने पैसे के लिए जीविका के चक्कर में लोग वहां पर जाकर दीवाली के लिए मिर्ची पटाखा बांधने का काम कर रहे थे।
आगे पढ़िए पटाखा फैक्ट्री में नहीं थे सुरक्षा संबंधी कोई भी इंतजाम...