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पटाखा विस्‍फोट: पीड़ितों ने कहा- सरकार राशन नहीं दे सकी तो मुआवजा कैसे देगी

7 वर्ष पहले
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लखनऊ. मोहनलालगंज के सिसेंडी पटाखा विस्‍फोट के बाद एसडीएम के आश्वासन के बावजूद भी पीड़ितों को पूरा राशन नहीं मिला। जहां एक ओर मृत‍कों का परिवार इस हादसे के बाद सदमें में है। वहीं, कुछ भ्रष्‍टाचारियों की मिलीभगत से इन्‍हें राहत सामग्री भी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में पीड़ियों का कहना है जब सरकार राशन नहीं दे सकती तो मुआवजे के दो लाख रुपए कैसे देगी।
सिसेंडी के पटाखा फैक्ट्री विस्फोट कांड के तीसरे दिन भी मृत‍कों रामखि‍लावन और गुड्डू के घरों के चूल्हे मदद की आस में उदास बैठे हैं। सोमवार को एसडीएम ने 50-50 किलो राशन देना का आश्वसन दिया था। इसके बाद भी दोनों घरों को महज दस-दस किलो मिला।

बताते चलें कि हादसे में मारे गए लोगों में मजदूर गुड्डू और रामखि‍लावन के घर न तो दिया जलाने की व्‍यवस्था थी और न ही खाने का कोई समान। ऐसे में तीसरे दिन जब अखबारों में दोनों परिवारों की खबर छपी तो उपजिलाधिकारी एसएन यादव ने गुड्डू और रामखि‍लावन के घर पहुंचकर परिजनों और बच्चों को मदद देने का आश्वासन दिया। वहीं, कोटेदारों से 25-25 किलो चावल और 25-25 कि गेहू दोनों परिवारों को देने के लिए कहा था, लेकिन मात्र 10-10 किलो ही राशन पहुंच सका।

कहां गई दाल और चीनी

सोमवार को एसडीएम एसएन यादव ने दाल और चीनी मंगवाई थी। दाल चीनी उनके सामने पैकेट में बंधवाकर भी आई, लेकिन उनके जाने के बाद जब गुड्डू और रामखि‍लावन के परिजनों से पूछा गया कि कितना सामान प्राप्त हुआ तो उन्‍होंने बताया कि दाल और चीनी की पैकेट तो उनके पास तक पहुंची ही नहीं। विस्‍फोट के बाद दोनों का परिवार कच्‍चे मकान में रह रहे हैं। इसमें दोनों अपने पांच-पांच बच्चों के साथ किसी तरह रहते हैं। वहीं, विकास की राह में बाधा बनने के नाम पर उनका यह घर भी सड़क के चौड़ीकरण में चला जाएगा।
तस्‍वीर में: कच्‍चे मकान के बाहर खड़ी मृतक गुड्डू की बहन।