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साहित्यकार दूधनाथ सिंह को मिला 'भारत भारती', 'हिंदी गौरव' बने सुरेश गौतम

राजधानी में डीएम आवास के सामने स्थित हिंदी संस्थान में रविवार को साहित्यकारों के लिए सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2014, 11:59 AM IST
Doodhnath Singh awarded by Bharat Bharti prize Hindi Sansthan Lucknow
फोटो: भारत भारती सम्मान से नवाजे गए साहित्यकार दूधनाथ सिंह के साथ मुलायम सिंह यादव
लखनऊ. राजधानी में डीएम आवास के सामने स्थित हिंदी संस्थान में रविवार को साहित्यकारों के लिए सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन शामिल हुए। इसमें साहित्यकार दूधनाथ सिंह भारत 'भारती सम्मान' से नवाजा गया।
इसके तहत मोमेंटो, सर्टिफिकेट के साथ पांच लाख रुपए का चेक मिला। इसके साथ ही साहित्यकार ममता कालिया को 'लोहिया सम्मान' मिला, जबकि डॉ. सुरेश गौतम को साल 2013 के 'हिंदी गौरव सम्मान' के लिए चुना गया। दोनों को मोमेंटो, सर्टिफिकेट और चार-चार लाख रुपए के चेक दिए गए।
45 साहित्यकार हुए सम्मानित
रविवार को यूपी हिंदी साहित्य सम्‍मान समारोह में मुलायम सिंह यादव, मंत्री अहमद हसन और राजेंद्र चौधरी के अलावा कार्यकारी अध्‍यक्ष उदय प्रताप सिंह भी शामिल हुए। समारोह में 45 साहित्यकारों को सम्‍मानित किया गया। कार्यक्रम में बोलते हुए हिंदी संस्‍थान के कार्यकारी अध्‍यक्ष उदय प्रताप सिंह ने बताया कि पुरस्‍कारों के लिए 100 लोगों के फोन आते थे। हर कोई अपने पसंदीदा साहित्यकार की सिफारिश करता था। यह गलत बात है, क्योंकि कमिटी पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही सम्‍मान देती है।
दूसरों की किताब की नकल भेज दी
उदय प्रतान ने यह भी बताया कि कुछ लोगों ने तो यह कारनामा किया कि दूसरों की लिखी हुई किताबों की हूबहू नकल करके भेज दी। उन्होंने बस एक पैराग्राफ बदल दिया। पूरी किताब वैसे ही छपवा कर भेज दी, ताकि पुरस्‍कार मिल सके। उन्होंने यह भी बताया कि लोग वोट तो आकर हिंदी में मांगते है, लेकिन संसद में जाते ही अंग्रेजी में बोलते हैं। यह तो देश के साथ एक तरह से गद्दारी ही है।
मुलायम की हुई तारीफ
संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष ने इस दौरान मुलायम की तारीफ की। उन्होंने बताया कि नेताजी ने हमेशा हिंदी को बढ़ावा दिया है। सपा से पहले बसपा सरकार ने कई पुरस्कारों को बंद कर दिया था। सीएम अखिलेश ने उन्हें दोबारा चालू किया है। साथ ही पुरस्कार राशि को भी बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि सम्मान देने की चीज है, मांगने की नहीं। मांगी तो भीख जाती है।
आगे पढ़िए, हिंदी संस्थान के सम्मान समारोह में क्या बोलें मुलायम...
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दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत करते मुलायम सिंह यादव
 
रक्षा मंत्रालय में शुरू की हिंदी
 
कार्यक्रम में बोलते हुए मुलायम सिंह ने कहा कि जब मैं रक्षामंत्री था, तब सबसे पहले मैंने ही विभाग में हिंदी में कामकाज शुरू करवाया था। उस समय हमारी काफी आलोचना हुई, आज यही बात हर कोई कर रहा है। जब दूसरे देश अपनी भाषा में कामकाज करते हैं, तो हम अपनी भारतीय भाषाओं में कामकाज क्यों नहीं कर सकते हैं। सपा सुप्रीमो ने कहा कि आप अंग्रेजी जरूर पढ़े, लेकिन कामकाज और बातचीत अपनी भाषा में ही करें। उन्होंने कहा कि जब मैं सीएम बना था, तो प्रदेश में 8 भाषाओं में पढ़ाया जाता था। आज ये सब बंद हो गया। 
 
हर भाषा के साहित्यकारों का हो सम्मान
 
उन्होंने बताया कि आज न जाने कितने साहित्यकार गरीबी में जी रहे हैं। उनकी आधी चिंता लिखने और आधी चिंता परिवार का गुजारा करने में चली जाती है। इसके बावजूद उनकी कलम रूकती नहीं है। इसलिए सरकार से कहेंगे कि इनका और सम्‍मान किया जाए। हर भाषा के साहित्यकारों को सम्‍मानित करना चाहिए। उन्‍होंने सभी साहित्यकारों से कहा कि आप अपनी सभी शिकायतें और सुझाव लिखकर दें। मैं उनपर कार्रवाई करने की पूरी कोशिश करूंगा।
 
आगे पढ़िए, मुलायम ने तमिल भाषा के लिए क्या कहा...
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सम्मान समारोह में बोलते मुलायम।
 
तमिल थोपने आया हूं
 
मुलायम ने इस दौरान एक पुराने किस्‍से का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक बार मैं एम. करूणानिधि ने मिलने गया था। उन्‍होंने कहा कि क्‍या आप हिंदी थोपने आए हैं। मैंने कहा नहीं, मैं तो तमिल थोपने आया हूं। वहां कई जगह अंग्रेजी में लिखा हुआ था। मैंने उनसे कहा कि आप सरकारी कामकाज तमिल में करें, हम भी जवाब तमिल में ही देंगे। ऐसा न होने के कारण ही तमिल सिर्फ आपके प्रदेश तक ही सीमित रह गई है।
 
तेजू की शादी की खबरें अखबार और टीवी पर
 
मुलायम सिंह ने बताया कि आजकल तो मीडिया में शादी की खबरें भी प्रमुखता से छप रही है। न्यूज चैनल वाले उनके पोते तेजू की लालू की बेटी के साथ शादी की खबरों पर प्रमुखता से दिखा रहे हैं। लालू यादव के साथ तो वह पिछले बीस साल से काम कर रहे हैं। बीच में जरूर विभाजन हो गया था, लेकिन अब सब ठीक हो गया है। हम समधी बन गए हैं।
मुझे पद की कभी लालसा नहीं रही है। पीएम और सीएम का पद कोई अमर नहीं होता है। आपका काम ही आपके नाम को अमर बनाता है। 
 
आगे पढ़िए, किन-किन साहित्यकारों का हुआ सम्मान...
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सम्मानित साहित्यकारों के साथ मुलायम सिंह यादव और अन्य मंत्री।
 
इनका हुआ सम्‍मान
 
4 लाख रुपए का महात्‍मा गांधी साहित्‍य सम्‍मान चंद्रकांता को, 4 लाख रुपए का पं दीन दयाल उपाध्‍याय साहित्‍य सम्‍मान डॉ. कन्‍हैया सिंह, 4 लाख रुपए का अवंतीबाई साहित्‍य सम्‍मान लाखन सिंह भदौरिया और 4 लाख रुपए का राजर्षि पुरूषोत्‍तम दास टंडन सम्‍मान असम राष्‍ट्रभाषा प्रचार समिति गोवाहाटी को दिया गया। इसके साथ ही बैजनाथ प्रसाद शुक्‍ल, डॉ राम सिंह यादव, डॉ. देवेंद्र दीपक, पुन्‍नी सिंह, डॉ. महावीर सरन जैन, डॉ. कुसुम खैमानी, डॉ. शंभु नाथ, नुचरत नाहीद, जमुना प्रसाद उपाध्‍याय और विभूति नारायण राय को साहित्य भूषण से नवाजा गया।
 
इन्हें मिला सम्‍मान और दो लाख रुपए
 
लोक भूषण सम्‍मान जगदीश पीयूष, कला भूषण सम्‍मान सरोजनी श्रीवास्‍तव, विद्या भूषण सम्‍मान डॉ. कुष्‍णा कुमार गोस्‍वामी, विज्ञान भूषण सम्‍मान डॉ. अशोक कुमार अग्रवाल, पत्रकारिता भूषण सम्‍मान प्रो. राममोहन पाठक, प्रवासी भारतीय हिंदी भूषण सम्‍मान प्रहलाद रामशरण (मॉरिशस) और बाल साहित्‍य भारती पुरस्‍कार डॉ. दिविक रमेश को दिया गया।
 
आगे जानिए, किनको मिला सौहार्द सम्मान..
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कार्यक्रम में मौजूद मुलायम सिंह यादव, सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन।
 
इन्हें मिला सौहार्द सम्‍मान
 
डॉ. गुरूशरण कौर (पंजाबी), डॉ. रमेश यादव (मराठी), डॉ. अरिबम ब्रजकुमार शर्मा (मणिपुरी), डॉ. अजय कुमार पटनायक (उड़िया), डॉ. राम गोविंदराजन (तमिल), डॉ. डीएन श्रीनाथ (कन्‍नड़), डॉ. बीना बुदकी (कश्‍मीरी), शकील सिद्दकी (ऊर्दू), मुनुकुट्ल पद्माराव (तेलुगु), साधना सान्‍याल (बंगाली), डॉ. एच परमेश्‍वरन (मलयालम), डॉ देवशंकर नवीन (मैथिली) और डॉ. भगीरथ प्रसाद त्रिपाठी (संस्‍कृत) को सौहार्द सम्‍मान दिया गया।
 
अन्‍य पुरस्‍कारों की भी हुई घोषणा 
 
इसके अलावा हिंदी विदेश प्रसार (दो लोग), विश्‍वविद्यालस्‍तरीय सम्‍मान (दो लोग), मधुलिमये साहित्‍य सम्‍मान(एक), पं श्रीनारायण चतुर्वेदी साहित्‍य सम्‍मान(एक), विधि भूषण सम्‍मान(एक), 2013 में प्रकाशित पुस्‍तकों के लिए सम्‍मान (25 लोग), 2013 में प्रकाशित पुस्‍तकों पर सर्जना पुरस्‍कार(21 लोग), हरिवंश राय बच्‍चन युवा गीतकार सम्‍मान अवनीश सिंह चौहान (टुकड़ा कागज का) और डॉ करूणा पांडेय को उनकी रचना 'यथार्थ की चादर' के लिए पं. बद्री प्रसाद शिंगलू स्‍मृति सम्‍मान दिया गया।    
 
आगे देखिए, खबर से जुड़ी अन्य तस्वीरें...
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