फोटो: डच चॉकलेट।
लखनऊ. यूपी के लोगों को भले ही स्विस चॉकलेट का मजा लेने के लिए उसे आयात करना पड़ता हो, लेकिन वह दिन दूर नहीं जब वे डच चॉकलेट का मजा लेंगे। ये चॉकलेट खास यूपी में ही बनाई जाएंगी। सीएम अखिलेश की नीदरलैंड यात्रा के बाद लखनऊ आए वहां के राजदूत एलफॉन्सस स्टोलिंगा ने इसकी उम्मीदें बढ़ा दी हैं। सोमवार को नीदरलैंड के एक डेलीगेशन ने अखिलेश यादव से मुलाकात की। इस दौरान कई अहम योजनाओं पर चर्चा की गई।
इस दौरान डच सहयोग से कृषि, फूड प्रोसेसिंग और डेयरी उद्योग में सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। इसके तहत कानपुर के चंद्रशेखर आजाद एग्रीकल्चर एंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी में एक पोटैटो कल्टीवेशन और प्रोसेसिंग सेंटर खोलने पर चर्चा हुई। इसके अलाव नीदरलैंड की वैजेनिन्जेन यूनिवर्सिटी और चंद्रशेखर आजाद एग्रीकल्चर एंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी के बीच भी एक एमओयू पर साइन करने के बारे में चर्चा की गई।
यूपी में मिलेंगे डच डेयरी प्रोडक्ट्स
इस मुलाक़ात के बाद डच कृषि और डेयरी उद्योग द्वारा यूपी में इस क्षेत्र में सहयोग और टेक्नोलॉजी सहयोग की संभावनाएं बढ़ गई हैं। खासतौर से नीदरलैंड के डेलीगेशन को भी डेयरी के क्षेत्र में सहयोग की काफी उम्मीदें हैं। यदि ऐसा होता है, तो प्रदेश में जल्द ही विश्वस्तरीय डेयरी प्रोडक्ट्स उपलब्ध होंगे। इनमे दूध, चीज, चॉकलेट जैसे प्रोडक्ट्स का स्वाद लेने का मौका यूपी के लोगों को मिलेगा।
नीदरलैंड के कुल उत्पादन का 10 फीसदी हिस्सा होता है एक्सपोर्ट
नीदरलैंड में खाद्य पदार्थों के एक्सपोर्ट में डेयरी प्रोडक्ट्स का कुल हिस्सा 10 फीसदी है। नीदरलैंड में फूड इंडस्ट्री का देश की जीडीपी में कुल योगदान 9 फीसदी है। यहां के डेयरी उत्पादक देश की 60 फीसदी कृषि योग्य जमीन डेयरी के लिए उपयोग करते हैं। इस देश में होने वाले कृषि उत्पादन का 17 फीसदी उत्पादन डेयरी क्षेत्र से आता है। ऐसे में यूपी सरकार का डच के कृषि क्षेत्र से समझौता होने पर फायदा होता दिख रहा है।
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