लखनऊ. राजधानी में जल्द ही ट्रैफिक नियमों तोड़कर बचना आसान नहीं होगा। ट्रैफिक पुलिस जल्द ही ई-चालान ड्राइवन इनफोर्समेंट सिस्टम के जरिए चालान करेगी। साथ ही चालान होते ही यह भी पता चल जाएगा कि इससे पहले गाड़ी का कितनी बार चालान हो चुका है। यह सारा डाटा इस सिस्टम के जरिए ट्रैफिक पुलिस के पास रहेगा।
ट्रैफिक पुलिस ने गाड़ियों के चालान को पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड करने का फैसला लिया है। ट्रैफिक पुलिस ई-चालान ड्राइवन इनफोर्समेंट सिस्टम से कही पर भी चालान की गतिविधि को ऑनलाइव करेगी। ई-चालान ड्राइवन इनफोर्समेंट सिस्टम मास्टर कंट्रोल रूम में स्थित सेंट्रल सर्वर से जुड़ा रहेगा। ऐसे में यदि कहीं पर भी किसी भी गाड़ी का चालान किया जाता है तो उस पर पूरी तरह से न सिर्फ निगरानी रखी जा सकेगी बल्कि पारदर्शिता भी रहेगी।
सेंट्रल सर्वर से जुडे रहने पर राजधानी में होने वाले चालान को सभी वरिष्ठ अफसर मॉनिटरिंग कर सकेंगे। इतना ही नहीं इससे बार-बार ट्रैफिक का उल्लघंन करने वाले रिकॉर्ड भी देखा जा सकेगा। कितना जुर्माना उसने पहले चालान के लिए जमा किया है या फिर बकाया है, इसका भी ब्यौरा होगा।
कमिटी देगी रिपोर्ट
जिस तरह से जनसंख्या बढ़ रही है, उसी के हिसाब से गाड़ियों की संख्या भी बढ़ रही है। ऐसे में ट्रैफिक को नियंत्रण के लिए मैनपॉवर संसाधन और उपकरणों की भी समय-समय पर आवश्यकता होगी। इसके लिए एक कमिटी बनाई जाएगी। यह हर तीन साल के बाद ट्रैफिक कंट्रोल के लिए जरुरी उपायों की समीक्षा करेगी।
यह कमिटी जिले की जनसंख्या, क्षेत्रफल, रजिस्टर्ड गाड़ियों की बढ़ती हुई संख्या, नई आवासीय कॉलोनियों के निर्माण और आवागमन के लिए बढ़ते हुए साधनों में वृद्धि की समीक्षा करेगी। इसके बाद बताएगी कि ट्रैफिक पुलिस को कितना मैनपॉवर चाहिए और क्या- क्या संसाधन ट्रैफिक कंट्रोल के लिए जरूरी है, जो जिले स्तर पर कमिटी गठित होगी। इसमें डीएम, एसएसपी, एसपी ट्रैफिक, नगर निगम के अफसर, विकास प्राधिकरण, लोकनिर्माण विभाग, परिवहन विभाग और सिटी ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के अफसर शामिल होंगे।
आगे पढ़िए, इंटीग्रेटेड पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर होगा जोर...