केजीएमयू में सीपीएमएस के तहत हो रहा है पीडियाट्रिक्स में इलाज (तस्वीर में)।
- घर पर मिलेगी मरीज की केस हिस्ट्री
- मरीज का केवल एक बार होगा रजिस्ट्रेशन
- सीपीएमएस के तहत मरीजों का होगा ऑनलाइन डाटा
लखनऊ. किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में इलाज को लेकर हो रही भीड़ से अब निजात मिल सकेगी। इसके लिए पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टरों को दिखाने तक की प्रक्रिया ऑनलाइन होने जा रही है। ऐसा हो जाने पर दूरदराज से आने वाले मरीजों को डॉक्टरों के नहीं होने या पर्चा बनवाने में देरी की परेशानी से नहीं जूझना पड़ेगा। मरीज ऑनलाइन इनरोलमेंट के जरिए पहले से ही डॉक्टर को दिखाने के लिए पर्चा ले सकेंगे।
केजीएमयू प्रशासन की इस मुहिम के साथ ही यूनिवर्सिटी पेपरलेस हो जाएगी। डॉक्टर मरीज के रोग और इलाज की हिस्ट्री को एक क्लिक से ऑनलाइन देख सकेंगे। सेंट्रल पेशेंट मैनेजमेंट सिस्टम (सीपीएमएस) को शुरू करने के मसले पर कुलपति प्रो. रविकांत कहते हैं कि यह एकदम पेपरलेस हॉस्पिटल बनने की योजना है।
इस योजना के तहत केजीएमयू के सभी कार्य कंप्यूटर से होंगे, लेकिन अभी इसको शुरू करने में वक्त लगेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि इसे पूर्ण रूप से लागू होने में एक साल तक का समय लग सकता है। योजना को शुरू करने के लिए सभी विभागों का कनेक्ट होना जरूरी है। तकरीबन दो हजार 400 कंप्यूटर इसके लिए लगाए जाएंगे। वर्तमान में केवल 200 कंप्यूटर ही खरीदे गए हैं।
दूर के मरीजों को दौड़ने से मिलेगी राहत
यूनिवर्सिटी में सीपीएमएस लागू हो जाने से राजधानी सहित दूरदराज के मरीजों को दौड़ना नहीं पड़ेगा। वह घर से ही डॉक्टर को दिखाने के लिए समय ले सकेंगे। यही नहीं, डॉक्टर के बारे में भी पूरी जानकारी मरीजों को ऑनलाइन ही मिलेगी। इसके लिए केजीएमयू नहीं आना पड़ेगा। इसके लिए वर्ष 2009 से यूनिवर्सिटी के सभी विभागों में सेंट्रल पेशेंट मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने के लिए काम चल रहा है। सब कुछ ठीक रहा तो दिसंबर तक केजीएमयू पेपरलेस हो जाएगा।
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