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ओजोन दिवस पर आंचलिक विज्ञान में तीन दिवसीय कार्यक्रम शुरू, छात्र बना रहे हैं पेंटिंग

7 वर्ष पहले
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लखनऊ. आंचलिक विज्ञान नगरी में ओजोन दिवस पर तीन दिवसीय कार्यक्रम चलाया जा रहा है। कार्यक्रम में 15 स्कूलों के 300 बच्चे हिस्सा ले रहे हैं। हर क्लास के बच्चों के लिए यहां कई तरह की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है।
पहली क्लास से पांचवीं तक के छात्रों ने चित्रकला प्रदर्शनी, छह से आठ तक के छात्रों ने पर्यावरण परिवर्तन और नौ से बारह के छात्रों ने जलवायु परिवर्तन पर ओजोन संरक्षण और हमारी गतिविधियां थीम से आयोजित प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।
आंचलिक विज्ञान नगरी के परियोजना संयोजक उमेश कुमार ने बताया कि प्रतिभागियों के प्रथम तीन विजेताओं को कार्यक्रम के समापन पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और कार्यकारी अध्यक्ष बायो टेक पार्क पीके सेठ पुरस्कृत करेंगे।

क्या होती है ओजोन लेयर
पृथ्वी के धरातल से 20-30 किमी की ऊंचाई पर वायुमंडल के समताप मंडल क्षेत्र में ओजोन गैस का एक पतला आवरण है। यह ओजोन परत पर्यावरण की रक्षक है। ओजोन परत हानिकारक पराबैंगनी किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकती है।
क्यों मनाया जाता है विश्व ओजोन दिवस
वर्ष 1987 में 16 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र आम सभा में प्रस्तावित मांटिंयल प्रोटोकाल ने अनेक देशों ने हस्ताक्षर किए थे। उस दिन लोगों को ओजोन परत में हो रहे नुकसान के बारे में जागरूक किया गया था।

ओजोन परत के क्षरण से होने वाले नुकसान
आंचलिक विज्ञान नगरी लखनऊ के परियोजना समायोजक विश्व ने बताया कि इसे मनाने के पीछे एक वजह है कि इस दिन ओजोन के बारे में जानकारी दी जाती है। छात्रों एवं आम लोगों को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी विकिरण से ओजोन परत को संरक्षित करने के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित करते हैं। ओजोन एक ढाल के रूप में पृथ्वी की सतह को हानिकारक पराबैंगनी विकिरण से बचाती है। यदि इस ओजोन परत का क्षय होता रहेगा, तो अधिक पराबैंगनी किरणें पृथ्वी और मानव स्वास्थ्य तक पहुंचेगी। इसका कुप्रभाव स्थलीय एवं जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में उपस्थित पेड़ पौधों एवं जंतुओं पर असर पड़ता है।
आगे देखिए, ओजोन प्रतियोगिता में पेंटिंग बना रहे छात्रों की अन्य तस्वीरें...