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लखनऊ/गोरखपुर/इलाहाबाद. कोहरे से निपटने के लिए रेलवे ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। लोको पायलट और स्टेशन मास्टर सहित संचालन से जुड़े कर्मचारियों के लिए ट्रेनिंग और जागरुकता अभियान जारी है। वहीं, ट्रेनों के ट्रैफिक पर कोहरे के कारण लगाम न लगे इसके लिए रेलवे ने ट्रेनों में फॉग सेफ्टी डिवाइस लगाने का काम शुरू कर दिया है। इसके बावजूद ट्रेनों की स्पीड पर कोहरे के चलते लग रहे ब्रेक को रेलवे रिलीज नहीं कर पा रहा है। इसका नतीजा यह है कि हल्के कोहरे में भी ट्रेनें घंटों देर से गंतव्य तक पहुंच रही हैं। इससे यात्री परेशान हैं।
हालांकि, ट्रेनों की लेटलतीफी दूर करने में विभाग भी खुद को असहाय महसूस कर रहा है। रेलवे ने उत्तर भारत में नॉर्दर्न रेलवे, नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे और नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे की ट्रेनों में 1381 फॉग सेफ्टी डिवाइस लगाए हैं। इसके अलावा कई जगह ट्रेन कोलिजन अवॉयडेंस सिस्टम और ट्रेन प्रोटेक्शन वार्निंग सिस्टम का ट्रायल चल रहा है।
कोहरे के चलते लगी रफ़्तार पर लगाम
कोहरे के मौसम में रेलवे ने अब एक सेक्शन पर दो ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है। घने कोहरे के चलते इस ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम की जगह मोडिफाइड सिस्टम लागू कर दिया गया है। इसमें एक ही ट्रैक पर दो निकटतम स्टेशनों के बीच एक ही ट्रेन चलती है। इसे ऑटोमेटिक प्रणाली को रोक कर लागू करते हैं। सामान्य मौसम में पहले एक सेक्शन पर चार ट्रेनें चल सकती थीं। रेलवे ने लोको पायलट्स को हिदायत दी है कि वह ट्रेन को 60 किमी. प्रति घंटा की स्पीड से उपर न जाएं। कोहरे में बरती जाने वाली सावधानियों के चलते ट्रेनें लेट होने लगी हैं।
रेल फ्रैक्चर पता लगाने के लिए कराई जा रही पेट्रोलिंग
सर्दी के मौसम में दिन और रात के टेम्परेचर में होने वाले बदलाव के चलते होने वाले रेल फ्रैक्चरों का समय से पता लगाने के लिए विशेष निगरानी के लिए भी पेट्रोलिंग कराई जा रही है। सिग्नलों की विजिबिलिटी के लिए उन पर लगे लेंसों की नियमित सफाई की जा रही है।
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