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विवि को इंटरनेशनल सेमिनार करने के लिए लेनी होगी विदेश मंत्रालय की अनुमति

7 वर्ष पहले
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प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

लखनऊ.
राज्‍य वि‍श्‍वविद्यालयों में अंतरराष्‍ट्रीय सेमि‍नार के नाम पर सालों से चल रहे खेल को अब शासन ने समाप्‍त करने का निर्णय लि‍या है। नई व्‍यवस्‍था के तहत सेमि‍नार की फंडि‍ग के लि‍ए शासन ने अंतरराष्‍ट्रीय सेमि‍नार के आयोजन को लेकर वि‍देश मंत्रालय की अनुमति को अनि‍वार्य रूप से लागू कर दि‍या है। मंत्रालय की मुहर के बाद इसके आयोजन के लि‍ए अब राज्‍य सरकार की भी परमीशन लेनी होगी। दोनों जगहों से अनुमति मिलने के बाद सेमिनार का आयोजन किया जा सकेगा।

नई व्‍यवस्‍था के तहत बगैर वि‍देश मंत्रालय और राज्य सरकार की अनुमति के राज्‍य वि‍श्‍वविद्यालय या महावि‍द्यालय अंतरराष्‍ट्रीय सेमि‍नार का आयोजन नहीं कर सकेंगे। बताते चलें, उच्‍च शि‍क्षण संस्‍थानों में अक्‍टूबर से लेकर जनवरी महीने तक सेमि‍नार, सि‍म्‍पोजि‍यम या फि‍र वर्कशाप का आयो‍जन किया जाता है। इस दौरान शासन की ओर से आवंटि‍त बजट से हर वि‍भाग में सेमि‍नार का आयोजन कराए जाने की प्रथा है। इस प्रथा में सबसे ज्‍यादा खेल की गुंजाइश अंतरराष्‍ट्रीय सेमि‍नार के आयोजन में रहती थी।

बताते चलें, अधि‍कतर संस्‍थानों में पड़ोसी मूल्‍क जैसे नेपाल या फि‍र पाकि‍स्‍तान से वि‍शेषज्ञों को बुलाकर अंतरराष्‍ट्रीय सेमि‍नार घोषि‍त कर दि‍या जाता है। सेमि‍नार के आगे अंतरराष्‍ट्रीय शब्‍द जुड़ जाने की वजह से कैरि‍यर एडवांसमेंट स्‍कीम में जहां शि‍क्षकों को एकेडमि‍क परफार्मेंस के लि‍ए निर्धा‍रित अंक पाने में आसानी रहती थी वहीं, आवंटि‍त बजट के बंदरबांट होने की संभावना भी बनी रहती थी। ऐसे में नई व्‍यवस्‍था के लागू होने के बाद इस बंदरबाट पर रोक लगेगी।

विदेश मंत्रालय को भेजा जाएगा प्रस्‍ताव

वि‍देश मंत्रालय को भेजे जाने वाले प्रस्‍ताव में इस बात का जि‍क्र रहेगा कि जि‍स वि‍शेषज्ञ को बुलाया जा रहा है, उसने क्‍या उपलब्‍धि हासि‍ल की है। दूसरा ये कि उसके आने से छात्रों या फि‍र शैक्षि‍क संस्‍था को शि‍क्षा में गुणात्‍मक सुधार को लेकर क्‍या मदद मि‍ल सकती है? इन प्रस्‍तावों पर गौर करने के बाद ही वि‍देश मंत्रालय अंतरराष्‍ट्रीय सेमिनार की अनुमति देगा।

आगे पढ़िए संसाधनों के आधार पर मिलेगी वित्‍तीय मदद...