तस्वीर में: मौलाना फरंगी महली किताब का विमोचन करते हुए।
लखनऊ. रविवार को ऐशबाग स्थित ईदगाह में एक पुस्तक विमोचन के दौरान मौलाना फरंगी महली ने कहा कि इस्लाम में दूसरा निकाह करने के लिए बहुत सख्त कानून हैं। इस्लाम दूसरा निकाह करने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया है। यदि किसी शख्स की एक पत्नी हो और उसकी मौजूदगी में दूसरी शादी करना चाहे, लेकिन उसको डर हो कि वह दोनों पत्नियों के बीच न्याय नहीं कर सकेगा, तो उसके लिए दूसरी शादी करना सही नहीं है।
बताते चलें कि रविवार को ऐशबाग ईदगाह में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तफ्हीम-ए-शरीअत कमेटी के तहत 'कानूने निकाह, बहु
विवाह और लैपालक इस्लामी अहकामात व हिदायत' किताब का विमोचन किया गया। इसी विषय पर एक सेमीनार भी आयोजित किया गया। किताब के लेखक मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली हैं। इस मौके पर मौलाना डॉ. सईदुर्रहमान आजमी नदवी ने कहा कि इस्लामी शरीअत के संबंध में लोगों को जो गलत फहमियां हैं वह इन सेमिनारों के माध्यम से दूर की जा सकती है।
मौलाना नदवी ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का उद्देश्य शरीअत की हिफाजत है। इसकी हिफाजत सरकार द्वारा नहीं की जा सकती, बल्कि इसकी जिम्मेदारी सब मुसलमानों पर होती है। सभी को कोशिश करनी होगी, जिससे यह पता चले कि वह अपनी जिंदगी में मुस्लिम पर्सनल लॉ को पूरी अहमियत देते हैं। मुसलमानों का ऐसा करना भविष्य में मुस्लिम पर्सनल लॉ की रक्षा का सबसे बड़ा जरिया है।
लोगों में इस्लाम को लेकर कई गलत फहमियां
बोर्ड के सदस्य जफरयाब जीलानी ने कहा कि यह बात सच है कि जिन विषयों पर यह सेमिनार आयोजित किया गया है। इस संबंध में लोगों के अंदर बहुत गलत फहमियां हैं। यदि वकील इन समस्याओं के इस्लामी नजरिए से परिचित होंगे तो जब उनके सामने यह समस्याएं कोर्ट में आएंगी तो वह ठीक तौर पर इस्लामी शरीअत और देश के कानून की रौशनी में अपनी बात कोर्ट के सामने रख सकेंगे।
आगे पढ़िए जफरयाब जीलानी ने कहा- अनाथ का पोषण करने से मां-बाप का दर्जा नहीं मिल सकता...