लखनऊ. गौरी मर्डर केस में पुलिस ने हत्यारोपी का पॉलीग्राफी और नार्को टेस्ट करवाने का फैसला लिया है। इसके लिए लखनऊ पुलिस जल्द ही कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगी। यह जानकारी लखनऊ के एसएसपी ने दी। मामले के खुलासे और पुलिस की किरकिरी के बाद यह फैसला डैमेज कंट्रोल के रूप में देखा जा रहा है।
दो दिन तक खामोश रहने वाले हत्यारोपी के परिजन भी मौका पाकर हिमांशु को अनर्गल फंसाने का आरोप पुलिस पर लगा रहे हैं। इससे खुद का पल्ला छुड़ाने के लिए पुलिस हिमांशु का नार्को और पॉलीग्राफी टेस्ट करवाना चाहती है। पुलिस के लिए सबसे बड़ी दुविधा यह है कि दोनों टेस्ट करवाने से पहले हत्यारोपी हिमांशु की सहमति आवश्यक है।
यदि हिमांशु के वकील ने पुलिस द्वारा करवाए जा रहे नार्को टेस्ट का विरोध किया तो पुलिस के इस मंसूबे पर पानी फिर जाएगा। इस बाबत एडवोकेट प्रयागदत्त पाण्डेय ने बताया कि नार्को टेस्ट की रिपोर्ट को न्यायालय में पुख्ता सुबूत के तौर पर नहीं माना जाता है।
क्यों है हंगामा
गौरतलब है कि गौरी हत्याकांड के खुलासे के बाद पुलिस द्वारा गाढ़ी गयी थ्योरी पर ज्यादातर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए थे। इसके बाद लखनऊ पुलिस की बहुत किरकिरी हुई थी। मामले को तूल पकड़ता देख आईजी लॉ एंड आर्डर ने लखनऊ के आईजी को मामले की समीक्षा करने का निर्देश दिया था। आईजी कानून व्यवस्था सतीश गणेश के निर्देश पर लखनऊ जोन के आईजी अब्बास जैदी ने डीआईजी, एसएसपी और फोरेंसिक एक्सपर्ट के साथ मामले की समीक्षा भी की।