लखनऊ. चर्चित गौरी मर्डर केस का लखनऊ पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस मामले में हत्यारे प्रेमी हिमांशु प्रजापति और उसके दोस्त अनुज को गिरफ्तार किया है, लेकिन मृतका गौरी के पिता शिशिर श्रीवास्तव इस खुलासे से पूरी तरह से संतुष्ट नहीं दिखे। dainikbhaskar.com के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ दो लोग इतनी बड़ी वारदात को अंजाम नहीं दे सकते हैं।
मृतका गौरी के पिता मानना था कि इस मामले में दो से ज्यादा लोग शामिल हैं। पुलिस को अभी और तहकीकात करनी चाहिए। वहीं, डीजीपी एके जैन ने कहा है कि अभी शुरुआती जांच के आधार पर दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यदि आगे की जांच में नए नाम सामने आते हैं, जो किसी भी तरह से इस मामले में शामिल रहे हो, उन्हें भी नहीं बख्शा जाएगा।
पुलिस ने गौरी मर्डर केस सुलझा करके अपने पीठ भले ही ठोंक ले, लेकिन इस बेबस पिता के चेहरे से मायूसी खत्म हो रही है। उन्होंने अपनी बेटी के खोने का गम रह-रहकर सताता है। उनका कहना था पूरे घटनाक्रम में पुलिस ने काफी लापरवाही भी बरती। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी की गुमशुदगी के लिए उन्होंने 100 नंबर डाल किया था, लेकिन वहां से कोई रिस्पांस नहीं आया। इसके बाद उनकी पुलिस स्टेशन पहुंचने पर उनके बेटी की गुमशुदगी की एफआईआर भी दर्ज काफी देर से दर्ज की गई। यदि पुलिस समय पर हरकत में आ जाती, तो शायद उनकी बेटी जिंदा होती।
बीजेपी ने भी लखनऊ पुलिस द्वारा गौरी मर्डर केस के खुलासे को हत्या के बाद उसके चरित्र की हत्या बताया है। भाजपा प्रवक्ता मनोज मिश्रा का कहना है कि पुलिस ने गौरी मर्डर केस में जो थ्योरी पेश की है, उसमें हत्या के बिंदु के जबाब में उसके चरित्र की भी हत्या कर दी। गौरी के परिवार को अपनी बेटी के चरित्र हत्या का सार्वजनिक सदमा भी सहना पड़ रहा है।
पुलिस को बताना चाहिए कि अखिर गौरी के गायब होने के बाद अमीनाबाद कोतवाली, मार्डन कन्ट्रोल रूम, 100,1090, की कार्य प्रणाली फेल क्यों थी? गौरी के गायब हो जाने का मामला जब पुलिस के संज्ञान में आ गया था, फिर हत्यारे लाश के टुकडे करके कैसे राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में ले जाकर फेंकने में सफल रहे? लापरवाह पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई हुई?
मृतका अमीनाबाद थाना क्षेत्र के गणेशगंज स्थित ग्रेन मार्केट की रहने वाली थी। उसके पिता शिशिर श्रीवास्तव पेशे से फैब्रीकेटर थे। लड़की बीते रविवार घर से पिता की जैकेट ड्राईक्लीन कराने के लिए निकली थी। काफी देर होने के बाद जब वह वापस नहीं आई तो मां ने फोन किया, लेकिन
मोबाइल स्विच ऑफ था। रविवार देर शाम घरवालों ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। इसके बाद अगले दिन पीजीआई थाना क्षेत्र के वृंदावन कॉलोनी में उनकी बेटी का शव टुकड़ों में बरामद हुआ था।
मृतका के पिता शिशिर श्रीवास्तव (जैकेट में)