लखनऊ. गौरी हत्याकांड के छह दिन बाद राजधानी पुलिस ने कातिल को हिरासत में ले लिया। पुलिस द्वारा मामले का खुलासा होने के बाद से मृतका गौरी के घर पर लगने वाली भीड़ भी छटने लगी है। सहानभूति देने के लिए गौरी के घर पर लगने वाली रिश्तेदारों और मोहल्ले वालों की भीड़ रविवार को नदारद दिखी। पिता शिशिर भी कुछ असंतुष्ट भाव से लोगों के सवालों का जवाब दे रहे थे। वहीं मां तृप्ता अभी भी पुलिस की थ्योरी से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखीं।
गौरी के पिता शिशिर अब भविष्य की तैयारियों में जुट गए हैं। उनकी मजबूरी है क्योंकि उनके सामने परिवार चलाने की जिम्मेदारी है। साथ ही बेटी की मौत का गम भी भुलाना है। शिशिर ने केस को अब फास्ट ट्रैक कोर्ट के तहत निपटाने की मांग की है, ताकि छह महीने के अंदर केस का फैसला हो जाए।
पुलिस की प्रेसवार्ता से लौटे गौरी के पिता शिशिर के चेहरे पर थकान साफ दिख रही थी, लेकिन बेटी की मौत का गम थकान पर भारी पड़ रहा था। dainikbhaskar.com की टीम से बातचीत में उन्होंने बताया कि मुझे नहीं लगता है कि दो लोग यह काम कर सकते हैं। शिशिर को आशंका है कि घटनाक्रम में कई और लोग शामिल हैं।
शिशिर ने आगे बताया कि यदि पुलिस की लापरवाही न बरतती तो शायद आज उनकी बेटी जिंदा होती। उनका कहना है कि जब उन्होंने 100 नंबर पर सूचना दी थी। उसी समय यदि पुलिस कार्रवाई करती, तो मेरी बच्ची की जान बच सकती थी। अपना दर्द बयान करते हुए शिशिर कहते हैं कि अगर कोई मुसीबत में होता है, तो पहले अपनों को बुलाता है। फिर जब कुछ नहीं सूझता तो वह पुलिस के पास जाता है। अब पुलिस ही सहयोग करना बंद कर देगी तो मेरी तरह अन्य की भी बच्चियों के साथ यही होगा।
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