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गौरी मर्डर: पोस्‍टमार्टम रिपोर्ट से मेल नहीं खा रही पुलिस की थ्‍योरी

6 वर्ष पहले
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लखनऊ. गौरी हत्‍याकांड में पुलिस ने जो खुलासा किया है, उससे आम जन सहमत नहीं हैं। इस हत्‍याकांड में डॉक्‍टर की पोस्‍टमार्टम रिपार्ट और हत्‍यारोपी के बयान में कोई ताल-मेल होता नहीं दिख रहा है। वहीं, पीजीआई पुलिस का दुकान से आरी खरीदना और दुकानदार को दिनभर थाने में बिठाकर रखने वाली बात कुछ और ही इशारा कर रही है। मृतक गौरी के भारी-भरकम शरीर को मोटरसाइकिल पर ले जाकर फेंकने वाली बात भी किसी को हजम नहीं हो रही है।

बताते चलें कि, गौरी हत्‍याकांड के मुख्‍य आरोपी हिमांशु प्रजापति ने अपना जुर्म तो कबूल कर लिया है। अपने बयान में आरोपी ने मकसद भी साफ कर दिया। इसके बावजूद आम जनों को एक बात खटक रही है कि खरीदी हुई नई आरी से किसी के भी शरीर को इतनी सफाई से नहीं काटा जा सकता है। नई आरी से किसी चीज को काटने के लिए पहले उसमें धार लगवाई जाती है।

हिमांशु से मिल नहीं सके परिजन

हिमांशु की मां ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि सोमवार को जब वह पेशी पर कोर्ट लाया गया था तो पुलिस ने उससे मिलने नहीं दिया। उस समय आरोपी के पिता भी वहीं मौजूद थे। वहीं, पुलिस का कहना है कि अब वह अपना अपराध कबूल कर चुका है। उसे किसी से नहीं मिलने देना पुलिस का अधिकार है।

शराबी नहीं है मेरा बेटा

पुलिस की पूरी कहानी पर सवाल उठा रहे हिमांशु और अनुज के परिजनों का कहना है कि पुलिस की पूरी थ्योरी बेबुनियाद है। अनुज की मां ने कहा कि उसका बेटा शराब नहीं पीता है। उसकी मां के मुताबिक, शराब के नहीं पीने वाली बात पूरा मोहल्‍ला जानता है। वहीं, आरोपी हिमांशु की मां भी यही कह रही है।

आगे ​पढ़ि​ए पोस्‍टमार्टम रिपोर्ट अौर बयान में है फर्क...