लखनऊ. गौरी हत्याकांड के खुलासे के बाद सवालों के घेरे में आए एसएसपी यशस्वी यादव की टीम कानून की धज्जियां उड़ाने में लगी हुई है। लखनऊ की सोशल एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर ने लखनऊ पुलिस पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाते हुए यूपी ह्यूमन राइट्स कमीशन और डीजीपी को पत्र लिखा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बिना किसी महिला पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में पुलिस ने आरोपी हिमांशु की मां और बहन डॉली से पूछताछ के लिए रात में पहुंची और उनके गहने और कपड़े भी उठा ले गई।
नूतन ठाकुर के मुताबिक, डॉली ने उन्हें बताया कि पुलिस हिमांशु की गिरफ्तारी की रात 12 बजे और फिर सुबह 4 बजे बिना महिला पुलिस के उनके घर पहुंची थी। यही नहीं उन्होंने घर की सभी महिलाओं के साथ अभद्रता की। इसके बाद घर में रखा दो सूटकेस भी बिना लिखापढ़ी के अपने साथ ले गए। इसमें उनके गहने और कपड़े थे। ऐसे में अब उनके पास पहनने लायक कपड़े भी नहीं रह गए हैं। वह लोगों से मांगकर कपड़े पहन रही है। बता दें कि बुधवार को नूतन ठाकुर अपने पति आईजी अमिताभ ठाकुर के साथ गौरी हत्याकांड के कथित घटनास्थल का दौरा करने गई थी। उन्होंने अभियुक्त की बहन डॉली से बातचीत के आधार पर उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग और यूपी के डीजीपी को अभियुक्त के परिवार वालों के मानवाधिकार उल्लंघन के संबंध में शिकायत की है।
बिना कोर्ट के आदेश के आरोपी के घर को किया सीलबंद
नूतन ठाकुर ने बताया कि पुलिस ने आरोपी हिमांशु का मकान भी बिना कोर्ट के आदेश के पूरी तरह सीलबंद कर दिया है। इसके चलते आरोपी का पूरा परिवार बाहर रहने को मजबूर है। नूतन ठाकुर ने इन्हें गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताते हुए तत्काल आरोपी के घर की सील खुलवाने की अपील की है।
फोटोः गौरी हत्याकांड का आरोपी हिमांशु प्रजापति (दाएं)।