लखनऊ. गौरी हत्याकांड को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन उसके टुकड़े करने वाले अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। इस जांच में पुलिस के साथ-साथ अब एसटीएफ को भी जोड़ दिया गया है, लेकिन घटना का खुलासा नहीं हो पाया है। ऐसे में अब गौरी हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग उठनी शुरू हो गई है। वहीं, शनिवार को पुलिस ने आरोपी पर इनाम की राशि बढ़ाकर 50000 कर दी है।
बताते चलें कि लखनऊ के अमीनाबाद क्षेत्र में रहने वाली कॉलेज स्टूडेंट गौरी का शव मंगलवार को पीजीआई के पास बोरी में बंद मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई थी कि हत्या करने से पहले उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए थे। उसके बाद किसी मशीन से उसके टुकड़े-टुकड़े किए गए। पुलिस ने इस मामले में करीबियों का हाथ होने का शक जताया है। गौरी के पिता शिशिर श्रीवास्तव इंटीरियर डेकोरेटर का सामान सप्लाई करते हैं। शिशिर श्रीवास्तव और तृप्ता की इकलौती बेटी गौरी परिवार के बीच बेटी नहीं बल्कि बेटा बनकर रहती थी। कोई भी उसे नजरअंदाज नहीं कर सकता था। बचपन से ही वह बहुत शरारती थी।
सीबीआई जांच की मांग
आल इंडिया मुस्लिम वीमेन पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर ने शनिवार को गौरी हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि मुलायम ने जिस तरह से बयान दिया था कि लड़के हैं गलती हो जाती है, ऐसे बयानों से यूपी के अपराधियों के हौसले बढ़ गए हैं। उन्होंने कहा यदि केंद्र सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो जल्द ही यूपी अपराधियों का प्रदेश बन जाएगा। उन्होंने मांग की है कि गौरी हत्याकांड की जल्द से जल्द सीबीआई जांच हो ताकि अपराधी सामने आ सके।
सामाजिक संगठन तहरीर ने भी की मांग
लखनऊ के एक सामाजिक संगठन तहरीर ने भी पुलिस जांच से असंतुष्ट होकर सीबीआई जांच की मांग की है। तहरीर के संस्थापक संजय शर्मा का कहना है कि पांच दिन बीतने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। जबकि सीएम अखिलेश यादव खुद इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए डीएम और एसएसपी को फटकार लगा चुके हैं। ऐसे में यदि अब तक पुलिस गौरी के हत्यारों का पता नहीं लगा पाई है तो अब केस की सीबीआई जांच होनी चाहिए। इसके लिए संस्था की ओर से सीएम अखिलेश यादव, राज्यपाल, मुख्य सचिव, डीजीपी, महिला आयोग की अध्यक्षा और लखनऊ के जिलाधिकारी, डीआईजी और एसएसपी को एक मांग पत्र भी भेजा गया है।
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