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12 साल तक घर में कैद-मांगी भीख, अब मेजर की ये बेटी जी रही ऐसी Life

DainikBhaskar.com ने अंजना और उसका इलाज करने वाले लखनऊ के निर्वाण हॉस्पिटल के डॉ. सुरेश धपोला से बात की।

Danik Bhaskar | Aug 28, 2017, 12:17 PM IST
मेजर की बेटी अंजना सड़कों पर इस हाल में भीख मांगते मिली थी। मेजर की बेटी अंजना सड़कों पर इस हाल में भीख मांगते मिली थी।
लखनऊ. पैरेंट्स की डैथ के सदमे में सालों तक खुद को घर में ही कैद रखने वाली एक मेजर की बेटी अंजना सड़कों पर भीख मांगते मिली थी। लेकिन अब वह ठीक है। आर्मी ने उसे अपने यहां कैंटीन में नौकरी भी दे दी है। अंजना के भाई अरुण का इलाज अभी चल रहा है। DainikBhaskar.com ने अंजना और उसका इलाज करने वाले लखनऊ के निर्वाण हॉस्पिटल के डॉ. सुरेश धपोला से बात की। 22 साल की उम्र में उठ गया था पैरेंट्स का साया
- अंजना के मुताबिक लखनऊ के इंदिरा नगर में उनका अपना घर है। साल 2004 में रोड एक्सीडेंट में अंजना के माता-पिता की डैथ हो गई थी। तब अंजना की उम्र 22 साल थी। अंजना के पिता बिपिन चंद्र भट्ट कुमाऊं रेजिमेंट में मेजर थे।
- अंजना तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर की है। पैरेंट्स की डैथ से लगे सदमे में कुछ दिन बाद उसकी बड़ी बहन की भी डैथ हो गई।
- अंजना ने लखनऊ यूनिवर्सिटी में एमए फर्स्ट ईयर में एडमिशन लिया था, लेकिन पैरेंट्स की डैथ के बाद पढ़ाई छूट गई।
घर तक सिमट गई थी दुनिया ...
- अंजना बताती है कि मम्मी-पापा की डैथ की खबर सुनकर उस रात हम तीनों भाई-बहन बहुत रोए। बड़ी बहन मुझे बहुत प्यार करती थी। लेकिन बहन की डैथ के बाद मैंने और भाई अरुण ने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया। कुछ दिनों बाद घर की बिजली और पानी की सप्लाई कट गई। घर भी खंडहर में तब्दील हो गया।
- अंजना का इलाज कर रहे डॉ. सुरेश धपोला ने बताया कि अगस्त 2016 में अंजना को एक दिन सड़कों पर रोते और भीख मांगते देखा गया। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस भाई-बहन को 26 अगस्त 2016 को निर्वाण हॉस्पिटल ले आई। उसके बाद से दोनों यहीं हैं।
- डॉ. सुरेश बताते हैं कि अंजना और अरुण को सिजोफ्रेनिया नाम की बीमारी है। ये बीमारी किसी को भी हो सकती है। इसमें व्यक्ति की याददाश्त कमजोर हो जाती है। पेशेंट अपने परिचितों को भी नहीं पहचान पाता। वह असामान्य तरीके से हरकतें करता है। पेशेंट को भीड़-भाड़ वाले इलाके में जाने से डर लगता है। हालत ज्यादा खराब होने की स्थिति में पेशेंट किसी पर हमला भी कर सकता है। हालांकि समय रहते ट्रीटमेंट शुरू कर दिया जाए तो पेशेंट को ठीक किया जा सकता है। डॉ. धपोला ने बताया कि दोनों भाई-बहन पहले से काफी ठीक हैं।
अंजना को आर्मी ने दी नौकरी
- अंजना और अरुण दोनों को अलग-अलग सेंटरों में रखा गया है। अंजना अब काफी हद तक ठीक है। अरुण का इलाज जारी है।
- आर्मी ने अंजना के बर्ताव में सुधार को देखते हुए उसे अपनी CSD कैंटीन में जॉब पर रख लिया है। उसने काम पर जाना शुरू भी कर दिया है।
- हॉस्पिटल की एक महिला स्टाफ रोज अंजना को आर्मी कैंटीन ले जाती है और वापस लाती है।
अब जी रही है ऐसी लाइफ
- अंजना को चलने-फिरने से लेकर खाने-पीने और बात करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। उसे डांस भी सिखाया जाता है।
- हॉस्पिटल का स्टाफ उसके भाई अरुण को उससे मिलाने के लिए लाता रहता है। अंजना अब अपने भाई के साथ घर जाना चाहती है।
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दायीं ओर की पिक्चर से साफ है कि अंजना की स्थिति में अब काफी सुधार आ गया है। दायीं ओर की पिक्चर से साफ है कि अंजना की स्थिति में अब काफी सुधार आ गया है।
अपने घर के बाहर इस तरह से बैठे मिले थे अंजना और उसका भाई अरुण। अपने घर के बाहर इस तरह से बैठे मिले थे अंजना और उसका भाई अरुण।
अगस्त 2016 में मेजर की बेटी अंजना को ऐसे सड़क से लाया गया था। अगस्त 2016 में मेजर की बेटी अंजना को ऐसे सड़क से लाया गया था।
उस वक्त सड़कों पर भीख मांगती थी अंजना। उस वक्त सड़कों पर भीख मांगती थी अंजना।
अंजना के भााई अरुण का इलाज करते डॉक्टर। अंजना के भााई अरुण का इलाज करते डॉक्टर।
हॉस्पिटल का स्टाफ अंजना और भाई अरुण से मुलाकात कराता रहता है। हॉस्पिटल का स्टाफ अंजना और भाई अरुण से मुलाकात कराता रहता है।
आर्मी ने अंजना के बर्ताव में सुधार को देखते हुए अपने यहां कैंटीन में जॉब दिया है। आर्मी ने अंजना के बर्ताव में सुधार को देखते हुए अपने यहां कैंटीन में जॉब दिया है।
अंजना की स्थिति अब काफी ठीक है। अंजना की स्थिति अब काफी ठीक है।