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हरी सब्‍जियों का अच्‍छी तरह धोकर करें सेवन, नहीं तो दिमाग में पड़ सकते हैं कीड़े

6 वर्ष पहले
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लखनऊ. यदि आप खाने में सब्‍जि‍यों को अच्‍छी तरह साफ कर प्रयोग में नहीं लाते हैं तो भवि‍ष्‍य में आपके दि‍माग की झि‍ल्‍ली में पानी या कीड़े हो सकते हैं। इसके चलते एक अच्‍छा-खासा
व्‍यक्‍ति 'न्‍यूरोसि‍स्‍ट सरकोसि‍स' नाम की बीमारी का शि‍कार हो सकता है। इसे आम भाषा में 'टीवी मेनि‍नजाइटि‍स' भी कह सकते हैं। इस बात का खुलासा केजीएमयू में मंगलवार को प्रो. धावेंद्र कुमार, युवा रिसर्चर गोल्ड मेडल पाने वाले न्‍यूरोलॉजी वि‍भाग के डॉ. हरदीप सिं‍ह मलहोत्रा ने अपने रि‍सर्च में किया।

डॉ. हरदीप सिंह मलहोत्रा ने बताया कि‍ ट्रापि‍कल न्‍यूरोलॉजी के तहत उन्‍होंने यह अध्‍ययन कि‍या है। उन्‍होंने बताया कि यदि सब्‍जि‍यों को अच्‍छी तरह साफ कर प्रयोग में नहीं लाया गया तो भवि‍ष्‍य में व्‍यक्‍ति के दि‍माग की झि‍ल्‍ली में पानी या कीड़े हो सकते हैं। उन्‍होंने बताया कि‍ इसकी मुख्य वजह है खाने-पीने की चीजों को बिना धोए खाना। खासकर कच्ची सब्जियों (गोभी, पालक, मूली), अधपकी सब्जी और मांस खाने की वजह से यह बीमारी होती है। उन्‍होंने बताया कि‍ सब्‍जि‍यां कहा पर उगाई जा रही हैं, इसको कोई देखने नहीं जाता है। ऐसे में जाहि‍र सी बात है कि‍ सब्जियों को तोड़ने के बाद गंदे पानी से ही सब्जी को धोया जाता है और उसी पानी से दिनभर सब्जियों में छिड़काव किया जाता है। ऐसे में कीड़े सब्जियों में आ जाते हैं, या सब्जियों के पत्तों में अंडे दे देते हैं।

भोजन की नली से आंतों की नली में पहुंचते हैं कीड़े

जो लोग अच्‍छे तरीके से धोए बगैर इनका सेवन करते हैं, उनके शरीर में ये कीड़े या सिस्ट शरीर में दाखिल हो जाते हैं। भोजन की नली के रास्‍ते आंतों में पहुंचने के बाद ये सिस्ट अपना जीवन चक्र पूरा करते हैं। सिस्ट का जीवन चक्र काफी छोटा होता है। इस वजह से यह कुछ दिनों में ही आंतों में हजारों अंडे दे देता है। इसके बाद इन अंडों से भी कीड़े निकलते हैं। इस तरह शरीर में सिस्ट की तादाद लगातार बढ़ने लगती है। सिस्ट के अंडे और लार्वा का आकार इतना छोटा होता है कि वह किडनी से होते हुए रक्त में प्रवेश कर जाते हैं।
इसके बाद वो शरीर के किसी भी हिस्से तक पहुंच सकते हैं। जब सिस्ट दिमाग में पहुंच जाता है तो यह शरीर के तंत्रिका तंत्र में होने वाले तरंगों के संचार में बाधा बनते हैं। इसके बाद दौरे आने लगते हैं। दौरे के समय शरीर अकड़ सा जाता है, जिसे सामान्य तौर पर मिर्गी समझने की लोग भूल करते हैं। चूंकि यह सिस्ट इंसान के नर्वस सिस्टम पर अटैक करते हैं, इसलिए इस बीमारी को न्यूरो सिस्टीसरकोसिस कहते हैं। इससे प्रभावित लोगों की आंखों में चमक सी होती है और कई बार तो आंख की रोशनी तक चली जाती है। यहां सिस्ट नर्वस सिस्टम में सूजन पैदा कर देते हैं। कई बार यह हाथ-पैर की मांसपेशियों या आंखों की मासपेशियों में भी जाते चले जाते हैं।

आगे पढ़िए दि‍माग की झि‍ल्‍ली में पानी या गांठ पैदा करती है मानसि‍क वि‍कार...