लखनऊ. हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने केंद्र सरकार से पूछा है कि एनएच 28 को बनाने में अब तक कितनी लागत आई है। इस पर बने टोल प्लाजाओं के माध्यम से अब तक कितनी वसूली की जा चुकी है। कोर्ट ने नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को भी आदेश दिया है कि इस संबंध में जानकारी देने के लिए 29 फरवरी को सक्षम अधिकारी व्यक्तिगत रूप से हाजिर हों।
यह आदेश जस्टिस एसएस चौहान और जस्टिस आरआर अवस्थी की बेंच ने अमिताभ प्रताप सिंह की ओर से दायर एक विचाराधीन पीआईएल पर दिया है। प्रार्थी के वकील बीके सिंह का तर्क था कि नियमों के अनुसार हर टोल प्लाजा के बीच कम से कम 60 किमी की दूरी होनी चाहिए। इस नियम की लखनऊ-गोरखपुर के बीच बने एनएच 28 पर खूब धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
इसमें कहा गया है कि कहीं-कहीं तो 35 से 40 किमी पर दूसरे टोल प्लाजा को लगाकर वसूली की जा रही है। यह भी आरोप लगाया कि इस एनएच को बनाने में कितनी लागत आई है, इसका कोई अता-पता नहीं है। सरकार टोल प्लाजा के माध्यम से वसूली करती चली जा रही है।
प्रतीकात्मक फोटो।