लखनऊ. हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन से पुराने शहर में कुड़ियाघाट के निकट स्थित आनंदीघाट के एक मामले में जवाब तलब किया है। ज्ञानेश्वर महादेव मंदिर को तोड़ने की तैयारी के खिलाफ दायर पीआईएल पर गुरुवार को निगम प्रशासन को जवाब देना होगा।
याचिकाकर्ता के वकील हरिशंकर जैन का कहना था कि जिला प्रशासन ने मंदिर की ओर जाने वाली सीढ़ियों की तरफ दीवार का निर्माण कर दिया। इससे उधर का रास्ता बंद हो गया। प्रशासन की मंशा उक्त मंदिर को ढहाकर वहां की जमीन दूसरे सम्प्रदाय के लोगों को देने की है। याचिका में जिला प्रशासन के कृत्य को संविधान के खिलाफ और तुष्टीकरण वाला बताया गया है।
हालांकि सरकारी वकील का कहना था कि जिला प्रशासन का ऐसा कोई इरादा नहीं है। इस पर कोर्ट ने सवाल किया है कि फिर सीढि़यों की ओर दीवार बनाकर रास्ता क्यों रोका गया। सरकारी वकील ने गुरूवार तक पूरे मामले से कोर्ट को अवगत कराने को कहा है। यह आदेश जस्टिस वीके शुक्ला और जस्टिस बीके श्रीवास्तव की बेंच ने रंजना अग्निहोत्री और अन्य की ओर से दायर याचिका पर पारित किया है।
कानपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति अवमानना में तलब
ऊधर, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्षत्रपति साहू जी महाराज यूनिवर्सिटी कानपुर के कुलपति प्रो. जेबी वैश्म्पायन को नोटिस जारी किया है। उन्हें 21 जनवरी को कोर्ट में स्पष्टीकरण के साथ हाजिर होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पूछा है कि आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया और क्यों न अवमानना के आरोप निर्मित किए जाए।
कोर्ट ने प्रथम दृष्टया जान बूझकर कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने का केस माना है और कहा है कि कुलपति कोर्ट में हाजिर होने के लिए टीए, डीए पाने के अधिकारी नहीं होंगे। कोर्ट ने विपक्षी को आदेश का अनुपालन करने का अवसर भी दिया है।
यह आदेश जस्टिस आरडी खरे ने डॉक्टर सुरेश चंद्रा की अवमानना याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कुलपति को याची का प्रत्यावेदन दो माह में करने का आदेश दिया था, जिसका पालन दो बार अवसर दिए जाने के बावजूद नहीं किया गया।
फोटोः प्रतीकात्मक।