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कोर्ट ने सबीहा के पति के घर जाने पर लगाई रोक, केजीएमयू बताएगा सही उम्र

7 वर्ष पहले
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लखनऊ. बलरामपुर की छात्रा सबीहा खुद को 20 साल की बताकर पति के घर जाने के लिए कहती है, लेकिन स्कूल सर्टिफिकेट में उम्र कम होने की वजह से कोर्ट उसे बालिग मानने को तैयार नहीं है। यह मामला पिछले एक साल से अनसुलझा हुआ है। इसकी वजह से वह कभी गवर्नमेंट प्रोटेक्टिव होम में रहती है, तो कभी पति के घर, लेकिन अब हाईकोर्ट के आदेश पर इसकी जांच किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) का पैनल करेगा। कोर्ट के आदेश देने के बाद केजीएमयू के रजिस्ट्रार ने सबीहा की सही उम्र का पता लगाने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 19 सितंबर को होगी।
मुहब्बत की चाह में सबीहा एक बार फिर गवर्नमेंट प्रोटेक्टिव होम पहुंच गई। पिता के घर जाने से इनकार करने पर कोर्ट ने उसे ससुराल न भेजकर, प्रोटेक्टिव होम भेज दिया। उसके पिता ने भी उसे ससुराल नहीं भेजे जाने की अपील की थी। स्कूल सर्टिफिकेट में सबीहा के नाबालिग होने की वजह से वह पति के साथ ससुराल नहीं जा सकती। कोर्ट ने सबीहा के बालिग होने तक फैजाबाद के गवर्नमेंट शेल्टर होम में रखने का आदेश दिया है।
जानकारी के मुताबिक, बलरामपुर की रहने वाली सबीहा ने वहीं के तुलसीपुर निवासी तबरेज से निकाह कर लिया था, लेकिन उसके पिता मसीहुद्दीन निकाह के खिलाफ थे। उन्होंने गैसड़ी थाने पर तबरेज के खिलाफ सबीहा को भगाकर ले जाने का मुकदमा दर्ज करा दिया। पुलिस ने सबीहा को बरामद कर सीजेएम बलरामपुर की कोर्ट में पेश किया। वहां सबीहा ने अपने पिता के साथ जाने से इंकार कर दिया। स्कूल सार्टिफिकेट में नाबालिग होने के कारण कोर्ट ने सबीहा को बालिग होने तक फैजाबाद के गवर्नमेंट शेल्टर होम में रखने का आदेश दे दिया था। नवीं क्लास की मार्कशीट के मुताबिक उसकी जन्मतिथि तीन दिसंबर वर्ष 2000 है।

डिवीजन बेंच के जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस महेंद्र दयाल के तलब करने पर सबीहा अपने ससुर इदरीस के साथ कोर्ट में हाजिर हुई। कोर्ट के पूछने पर उसने अपनी उम्र लगभग 20 साल बताई। जजों ने पाया कि देखने से सबीहा की उम्र कम लग रही है और स्कूल का सर्टिफिकेट भी उसे नाबालिग बता रहा है। इसके बाद बेंच ने उम्र का सही सही निर्धारण करने के लिए केजीएमयू को निर्देश जारी कर दिया। कोर्ट ने उसे फैजाबाद प्रोटेक्टिव होम की सुपरिटेंडेंट रेनू लाल के साथ सुरक्षा बंदोबस्त में भेजते हुए 19 सितंबर को फिर से पेश करने का आदेश दिया है।
डिवीजन बेंच ने एकल पीठ के एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर विभिन्न सरकारी गृहों में बंद तमाम महिला बंदियों को तलब कर छोड़ देने का आदेश पारित करने पर हैरानी जताई है। बेंच ने अगली सुनवायी तक सिंगल बेंच की सुनवाई पर रोक लगा दी है। साथ ही स्पष्टीकरण मांगा है कि उक्त मामला डिवीजन बेंच की बजाय एकल बेंच के सामने क्यों पेश किया गया। इसी केस की सुनवाई के दौरान सबीहा को ससुर के साथ पति के घर जाने दिया गया था।