लखनऊ. हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सपा सरकार को प्रदेश में यूपी राजस्व कोड-2006 लागू नहीं करने पर आड़े हाथों लिया है। कोर्ट ने कहा है कि विधायिका द्वारा पारित कानून पर सरकारी बाबू कुंडली मार कर नहीं बैठ सकते हैं। कोर्ट ने प्रमुख सचिव राजस्व सुरेश चंद्रा को तलब कर उन्हें सख्त ताकीद की कि 18 दिसंबर तक कोड को लागू करने की कवायद पूरी कर कोर्ट को अवगत कराया जाए।
यह आदेश जस्टिस सुधीर कुमार सक्सेना की बेंच ने राजस्व मामले को लेकर दायर एक रिट याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किया है। बेंच ने कहा कि राजस्व मामले की सुनवाई में मौजूदा प्रकिया में तमाम खामियों के चलते विधानसभा ने 2006 में एक रेवेन्यू कोड बनाया। इसका तात्पर्य था कि राजस्व मामलों में परत-दर-परत खामियों को दुरूस्त किया जाए। इससे लोगों को पारदर्शी और शीघ्र न्याय के साथ-साथ कई स्तरों पर चलने वाली सालों लटकी रहने वाली प्रकिया को बदला जा सकेगा।
इस कोड को प्रदेश में लागू करने के लिए राष्ट्रपति ने भी 29 नवंबर 2012 को अपनी सहमति दे दी। इस कोड को लागू करने के लिए कार्यपालिका को एक नोटिफिकेशन जारी करना है। अरसे से बना कानून उक्त नोटिफिकेशन के नहीं जारी होने के चलते गर्त में है। बेंच ने कहा कि यह एक प्रकार से विधायिका के अधिकार पर हमला है। कार्यपालिका अपने कृत्यों से विधायिका द्वारा पारित कानून को अनिश्चित काल के लिए नहीं लटका सकता। सरकार अपनी शक्तियों का प्रयोग विधायिका द्वारा बनाए कानून को लागू करने से रोकने के लिए नहीं कर सकती।
सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता जफरयाब जिलानी ने कहा चूंकि कोड को लागू करने से पूर्व जरूरी नियमावली नहीं बन पाई है, लिहाजा कोड लागू करने में देरी हो रही है। जिलानी के जवाब पर बेंच ने और तल्खी दिखायी और कहा था कि यदि नियमावली नहीं बन पाई है, तो इसमें सरकार की ही तो गलती है।
बेंच ने कहा कि यदि कोड को लागू करने से पहले कुछ संशोधन की आवश्यकता थी, तो सरकार इसके लिए मामले को विधानसभा में पेश कर सकती थी। किसी भी हालत में सरकार विधानसभा में पारित कानून को लागू करने पर निष्क्रिय नहीं रह सकती। बेंच ने कोड लागू करने के लिए सरकार को 18 दिसंबर तक का समय दिया है।
फोटोः प्रतीकात्मक।