लखनऊ. पर्यटन विभाग ने ऐतिहासिक इमारतों, किलो, कोठियों और महलों में हेरीटेज होटल बनाने के लिए एक नया प्रस्ताव बनाया है। यह प्रस्ताव पर्यटन को बढ़ावा देने और ऐतिहासिक इमारतों को संरक्षण देने के उद्देश्य बनाने के लिए तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव में अब हेरिटेज होटल बनाने वाले को स्टांप ड्यूटी फीस दो साल संचालन के बाद वापस करने की जगह पर अब शुरू में ही मिल जाएगी।
दरअसल, पर्यटन विभाग ने इस योजना को परवान चढ़ाने के लिए स्टांप फीस में छूट का प्रावधान रखा था। यह राशि पर्यटन विभाग हेरीटेज होटल के निर्माण और सफल संचालन के दो साल बाद देने का प्रावधान था। हेरीटेज होटल बनाने वालों की मांग थी कि इसे दो साल बाद देने की बजाए शुरु में ही दे दिया जाए। इसके बाद इसमें फेरबदल किया गया है। अब इस प्रस्ताव को कैबिनेट में रखा जाएगा।
पर्यटन विभाग के उपनिदेशक एसी मिश्रा ने बताया कि जो लोग इस योजना में रुचि ले रहे हैं। उनकी मांग थी कि इस छूट का फायदा उन्हें शुरू में ही दे दिया जाए। इससे उन्हें भी फायदा रहेगा और वे छूट के रुपए का सही इस्तेमाल कर सकेंगे। करीब पूरे राज्य से बीस ऐसी ऐतिहासिक इमारतों किले और कोठी को हेरिटेज होटल बनाने का प्रस्ताव आया है। अब इसका प्रस्ताव बनाकर फिर से इसे कैबिनेट के लिए भेजेंगे। कैबिनेट से पास होने के बाद इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
डिप्टी डॉयरेक्टर एसी मिश्रा ने बताया कि उन्होंने लोगों से आवेदन मांगे थे। कई जिलों से 20 आवेदन मिले हैं। इनमें लखनऊ के तीन जगह के प्रपोजल हैं। इसके अलावा लखीमपुर खीरी से दो, सिद्धार्थनगर की दो, नजीबाबाद की एक, महोबा की दो, आगरा से दो, इटावा से तीन, बनारस से दो ऐतिहासिक इमारते हैं। इनके मालिक हेरीटेज होटल विकसित करना चाहते हैं।
उन्होंने बताया कि इनमें कई किले हैं और महल हैं। कुछ कोठी भी हैं। इनमें लखनऊ में जहांगीराबाद पैलेस, सिद्धार्थनगर का रॉयल र्रिटीट हेरिटेज होटल, रामपुरा का फोर्ट हेरिटेज और लखीमपुर खीरी की सिंघाही इमारत शामिल है। इनमें से कुछ पहले से चल रहे है, लेकिन इन्हें और ज्यादा भव्य बनाया जाएगा। जिन्हें अब हेरिटज होटल के रुप में विकसित किया जाएगा। लोगों को पर्यटन विभाग न सिर्फ होटल विकसित करने के लिए बैंक से लोन दिलाएगा बल्कि जो लागत आएगी, उसका 25 फीसदी अनुदान के रुप में देगा, लेकिन डेढ़ करोड से ज्यादा यह राशि नहीं होगी।
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