फोटो: मानवाधिकार आयोग का लोगो।
ह्यूमन राइट्स डे: हर साल 10 दिसंबर को 'ह्यूमन राइट्स डे' मनाया जाता है। यूपी में कई ऐसी जगह हैं, जहां आज भी लोग अपने अधिकारों से वंचित हैं। इसी कड़ी में dainikbhaskar.com आपको अपनी अधिकार के बोरे में जानकारी दे रहा है। लखनऊ. मानवाधिकार से तात्पर्य उन मौलिक अधिकारों से है, जो हमें संविधान ने दिए हैं। इन मौलिक अधिकारों में हमें समानता, स्वतंत्रता और शिक्षा के अधिकारों के साथ-साथ बराबरी का हक दिया गया है। यदि इन अधिकारों का कहीं पर भी हनन किया जाता है तो इसके लिए कोई भी आवाज उठा सकता है और मानवाधिकार आयोग में शिकायत कर सकता है। इसके लिए बाकायदा ह्यूमन राइट्स एक्ट भी बना हुआ है।
यह एक्ट 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा में पास हुआ था। इस दौरान सामान्य सभा ने कहा था कि यह अधिकार मानव की गरिमा है और इन्हें कभी नहीं छीना जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र ने सभी देशों से इस बात का आग्रह भी किया था कि इसका न सिर्फ प्रचार-प्रसार करें बल्कि इसे अपने-अपने देश में लागू करके इसका कड़ाई से पालन करें।
बहुत ऐसे लोग हैं जिन्हें मानवाधिकार के बारे में नहीं है जानकारी
इसके बावजूद आज समाज में मानवाधिकार के लिए बने हुए कानूनों का न सिर्फ उल्लंघन हो रहा है बल्कि बहुत से गरीब और आदिवासी लोग अपने अधिकारों से वंचित हैं। वहीं, बहुत ऐसे लोग हैं जिन्हें मानवाधिकार के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं है। जबकि, संविधान के भाग-तीन में मौलिक अधिकारों के बारे में उल्लेख किया गया है। जिसमें समता, स्वतंत्रता, शोषण के विरुध, धर्म की स्वतंत्रता, संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकारों के बारे में पूरी तरह बताया गया है।
इन अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया है मानवाधिकार आयोग
इन अधिकारों की रक्षा के लिए मानवाधिकार अधिनियम एक्ट 1993 बनाया गया है। इसके अंतर्गत मानवाधिकार आयोग का गठन किया गया। अधनियम के अंतर्गत आयोग को सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के अंतर्गत सिविल न्यायालय के सभी अधिकार मिले हैं। जब इन अधिकारों का हनन होता है और कोई शिकायत करता है तो आयोग संबंधित पक्ष और गवाहों को सम्मन जारी करके बुला सकता है।
आगे पढ़िए मानवाधिकार आयोग के बारे में और क्या-क्या हैं अधिकार…