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जब एक आम युवक ने इंदिरा को दी मात, अलग-थलग हो गई कांग्रेस

Dainik Bhaskar

Nov 17, 2014, 09:04 AM IST

1977 के लोकसभा चुनाव में उन्हें राजनारायण ने हरा दिया था।

Indira Gandhi Birth Anniversary Raj Narayan defeated Indira in Parliamentary elections
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फोटो: इंदिरा गांधी और राजनारायण।
इंदि‍रा गांधी के जन्‍म दि‍वस पर विशेष: 19 नवंबर को देश की पहली महि‍ला प्रधानमंत्री इंदि‍रा गांधी का जन्‍मदि‍न है। इस मौके पर dainikbhaskar.com उनके जीवन के वि‍भि‍न्‍न पहलुओं से संबंधि‍त सुनी-अनसुनी कहानियों से आपको रूबरू करा रहा है।

लखनऊ. इंदिरा गांधी का नाम आते ही एक मजबूत, दृढ़निश्चयी और ऊर्जावान महिला की छवि सामने आती है। देश के पहले प्रधानमंत्री की बेटी और आयरन लेडी के नाम से जानी जाने वाली इंदिरा ने अपने नेतृत्व से देश को नई दिशा दी। साथ ही, पूरे विश्व में भारत की धाक जमा दी। साल 1977 के लोकसभा चुनाव में उन्हें समाजवादी नेता राजनारायण ने ऐसी चुनौती दी कि इंदिरा के साथ-साथ कांग्रेस के कई दिग्गज नेता हार गए। देश की सबसे ताकतवर महिला को उन्हीं के क्षेत्र में जाकर राजनारायण ने लोकसभा चुनाव में हरा दिया। इसके बाद पूरी कांग्रेस पार्टी ही अलग-थलग पड़ गई।
दूसरी आजादी के प्रणेता जयप्रकाश नारायण के सबसे ताकतवर साथियों में एक राजनारायण ने इंदिरा गांधी को 1971 के लोकसभा चुनाव में कड़ी चुनौती दी थी। हालांकि, वह चुनाव हार गए थे। इसके चार साल बाद चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए उन्होंने इसे रद्द करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जगमोहन लाल सिन्हा ने फैसला सुनाते हुए चुनाव को रद्द कर दिया।
इंदिरा ने इमरजेंसी लगा दिया
कोर्ट के इस फैसले के बाद जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन ने पूरे देश की तस्वीर बदल दी। इंदिरा ने देश में इमरजेंसी लगा दिया। इसके बाद, भारतीय इतिहास का जो दौर शुरू हुआ, उसे काला अध्याय माना जाता है। बहरहाल, इमरजेंसी खत्म होने के बाद 1977 में हुए चुनावों में राजनारायण ने रायबरेली लोकसभा सीट से इंदिरा गांधी को चुनाव में भी हरा दिया। इस चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज उम्मीदवारों को भी हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद जनता पार्टी की सरकार बनी। जेपी का छात्र आंदोलन पूरी तरह सफल हुआ।
देश के युवाओं और छात्रों ने लिया था हिस्सा
कहा जाता है कि आपातकाल इंदिरा ने अपनी नीतियों को थोपने के लिए लगाया था। इन नीतियों के खिलाफ ही जयप्रकाश नारायण ने देशव्यापी आंदोलन छेड़ दिया था। इसमें देश के युवाओं और छात्रों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था।
आगे पढ़िए जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का दिया था नारा...

Indira Gandhi Birth Anniversary Raj Narayan defeated Indira in Parliamentary elections
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फोटो: जयप्रकाश नारायण।
 
संपूर्ण क्रांति का दिया था नारा
 
5 जून, 1975 की विशाल जनसभा में जयप्रकाश नारायण ने पहली बार 'संपूर्ण क्रांति' का नारा दिया था। उनका कहना था कि देश को ऊंचाइयों तक ले जाना है और सचमुच में स्वतंत्र भारत की कल्पना करनी है तो इंदिरा सरकार को हटाना होगा। उनके इस नारे के साथ यूपी और बिहार के साथ-साथ पूरे देश के युवा और छात्र आगे आए।
 
छात्र-नौजवानों की हुई गिरफ्तारी
 
छात्र-युवाओं के बढ़ते आंदोलन और विपक्ष को मजबूत होता देख इंदिरा ने तमाम विपक्षी नेताओं के साथ-साथ भारी संख्या में छात्रों-नौजवानों की गिरफ्तारियां करवा दी। इसके बावजूद छात्रों-नौजवानों का जुनून ठंडा नहीं हुआ और उनके आगे सरकार को झुकना पड़ा। यही नहीं, इस आंदोलन के बाद चुनावों में कांग्रेस की भीषण पराजय हुई।
 
आगे पढ़िए, आखिर क्या हुआ था 1971 के चुनाव में...
 
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फोटो: इंदिरा गांधी।
 
आखिर क्या हुआ था 1971 लोकसभा चुनाव में
 
1971 का चुनाव दो नारों की वजह से याद किया जाता है। उस समय की चुनावी रैलियों में या तो 'गरीबी हटाओ' या फिर 'इंदिरा हटाओ' जैसे नारे सुनने को मिलते थे। इंदिरा गांधी ने 'गरीबी हटाओ' का नारा दिया, लेकिन विरोधियों ने 'इंदिरा हटाओ' की मुहिम चलाई। इस पर इंदिरा गांधी अपनी रैलियों में ये कहना नहीं भूलती थीं- वो कहते हैं 'इंदिरा हटाओ' और हम कहते हैं 'गरीबी हटाओ'।

1971 से ही कमजोर पड़ने लगी थी इंदिरा
 
1971 के चुनाव में इंदिरा की छवि बदल गई थी। गूंगी गुड़िया कही जाने वाली इंदिरा गांधी तेज-तर्रार नेता के रूप में उभर चुकी थीं। इंदिरा के खिलाफ राजनारायण चुनाव में उतरे। नए-नए नारों के बीच इंदिरा ये चुनाव जीत गईं, लेकिन इसके चार साल बाद राजनारायण ने कोर्ट में याचिका दाखिल की। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी जांच में इंदिरा को धांधली करने, चुनाव में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने, तय सीमा से अधिक खर्च करने और मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल करने का दोषी पाया।
 
कोर्ट ने लगाया प्रतिबंध
 
कोर्ट ने इंदिरा के ऊपर छह साल तक कोई भी पद संभालने पर प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन इंदिरा ने इस फैसले को मानने से इनकार करते हुए इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय लिया। इसके बाद 26 जून को उन्होंने आपातकाल की घोषणा कर दी। साल 1977 में लोकसभा चुनाव हुआ। इसमें इंदिरा को हार का सामना करना पड़ा। 1977 में देश की सबसे कद्दावर नेता इंदिरा गांधी को राजनारायण ने जब हराया, तो देश में पहली बार यही संदेश गया कि जनता ने इंदिरा को हरा दिया। 
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