लखनऊ. जेएनयू में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने वाले स्टूडेंट लीडर कन्हैया कुमार को रिहाई मंच सम्मानित करेगा। ये वही रिहाई मंच है जिसने मोदी गो बैक के नारे लगाने वाले स्टूडेंट्स को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया था।
कौन है रिहाई मंच?
- यह एक संगठन हैं, जो संघ और बीजेपी के खिलाफ मुहिम चलाता है।
- मंच का मानना है कि बीजेपी और संघ ये तय नहीं करेंगे कि कौन देशभक्त है और कौन देशद्रोही।
- आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार हुए तारिक कासमी के सपोर्ट में खड़े हाेने के बाद ये मंच हाईलाइट हुआ।
- इनके अध्यक्ष मोहम्मद शुएब पर भी पाकिस्तान जिंदाबाद नारे लगाने का आरोप लगा था। इनका वकीलों ने मुंह भी काला किया था।
- मंच ने 8 ऐसे लोगों को जेल से रिहा करवाया है, जिनके ऊपर लखनऊ समेत कई शहरों में सीरियल ब्लास्ट का आरोप था।
कौन है कन्हैया कुमार?
- दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के छात्र संघ के अध्यक्ष हैं।
- इनके पिता किसानी करते हैं। वर्तमान में वह पैरालाइसिस की बीमारी से पीड़ित हैं।
- मां आंगनबाड़ी वर्कर है। वह 4 हजार रुपए हर महीने कमाती हैं।
- उसका कहना है कि मेरा बेटा देशद्रोही नहीं है।
- कन्हैया ने जेएनयू में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए थे।
- इसके लिए उसे 3 दिनों की रिमांड पर जेल भेजा गया है।
क्या हुआ था जेएनयू में?
- जेएनयू में कुछ छात्रों ने कन्हैया कुमार के लीडरशिप में संसद पर हमले के दोषी आतंकी अफजल गुरु की बरसी मनाई और इस मौके पर देश विरोधी नारे भी लगाए।
- दरअसल, लेफ्ट स्टूडेंट ग्रुप्स ने संसद अटैक के दोषी अफजल गुरु और जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के को-फाउंडर मकबूल भट की याद में एक प्रोग्राम ऑर्गनाइज किया था।
- इस प्रोग्राम को पहले इजाजत को मिल गई थी। लेकिन एबीवीपी ने इसके खिलाफ यूनिवर्सिटी के वीसी एम जगदीश कुमार के पास शिकायत की।
- इसके बाद जेएनयू एडमिनिस्ट्रेशन ने परमिशन वापस ले ली।
- प्रोग्राम साबरमती हॉस्टल के सामने 9 फरवरी को शाम 5 बजे होना था।
- टेंशन तब बढ़नी शुरू हुई जब परमिशन कैंसल करने के बावजूद प्रोग्राम हुआ। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया।
- प्रोग्राम होने से नाराज एबीवीपी ने बुधवार को जेएनयू कैम्पस में बंद बुलाया।
- बता दें कि अफजल को 9 फरवरी 2013 और मकबूल भट को 11 फरवरी 1984 को फांसी दी गई थी।
अटल बिहारी के देशद्रोही होने का है सबूत
- मंच के प्रवक्ता शहनवाज आलम ने बताया, "1942 में अटल बिहारी वाजपेयी ने लीलाधर वाजपेयी को जेल भिजवाया था। उन्होंने अंग्रेजों के साथ मिलकर मुखबिरी की थी। आरएसएस फाउंडर मेंबर हेडगेवार, आंदोलन के समय अंग्रेजी जेलर के साथ मिल गए थे।"
-उन्होंने बताया, "एक ओर जहां आंदोलनकारी भूखे प्यासे मर रहे थे, वहीं ये जेलर के साथ मिलकर छप्पन भोग का आनंद उठा रहे थे। इस बात के सबूत हमारे पास हैं।"
पॉलीटिकल पार्टियों का क्या है कहना ?
- यूपी बीजेपी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक का कहना है कि ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाना चाहिए।
- आरएसएस के अवध प्रांत प्रचारक दिवाकर अवस्थी ने कहा कि हम ऐसे लोगों की बातों पर ध्यान नहीं देते। ज्यादा होगा तो करवाएंगे मानहानि का मुकदमा।