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केजीएमयू में जूनियर डॉक्‍टरों की हड़ताल, मरीजों का हाल बेहाल

9 वर्ष पहले
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लखनऊ. राजधानी लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में जूनियर डॉक्‍टरों की हड़ताल जारी है। दिन प्रदर्शन का दौर चलता रहा। दोपहर में जूनियर डॉक्‍टरों ने हंगामा किया और जबरदस्‍ती अस्‍पताल का मुख्‍य गेट भी बंद करा दिया। लेकिन कुछ देर बाद गेट खुलवा लिया गया है। ताजा खबर ये है कि इस समय जूनियर डॉक्‍टरों के एक दल की केजीएमयू वीसी, रजिस्‍ट्रार और सीएमएस के साथ बातचीत चल रही है लेकिन अभी हड़ताल पर कोई फैसला नहीं लिया जा सका है। उधर हड़ताल के कारण पूरे अस्‍पताल की व्‍यवस्‍था चरमरा कर गई है। सैकड़ों मरीज शहर के दूसरे अस्‍पतालों में इलाज के लिए जा रहे हैं। अधिकतर मरीजों को बलरामपुर अस्‍पताल शिफ्ट किया गया है।
जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि करीब चार महीने पहले गांधी वार्ड में मारपीट मामले में पुलिस ने उनके साथी डॉक्टरों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की है। दूसरे पक्ष के लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर 5 डॉक्टरों समेत 9 लोगों को आरोपी बनाया है। इसी को लेकर जूनियर डॉक्टरों ने अचानक रविवार को आठ घंटे तक ट्रॉमा सेंटर पर प्रदर्शन और नारेबाजी की।
इस दौरान इलाज के लिए ट्रामा सेंटर में भरती करीब 40 से ज्यादा गंभीर मरीजों की कोई देखभाल नहीं हो सकी और न ही बाहर से आने वाले गंभीर मरीजों को भीतर जाने दिया गया। इलाज के अभाव में ट्रामा सेंटर में बंधक बने चार मरीजों की मौत हो गई। जूनियर डॉक्टरों ने केजीएमयू के गांधी वार्ड में भी इलाज ठप रखा। बाद में ट्रामा सेंटर के प्रभारी ने पुलिस की मदद से प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों को खदेड़ा और सीनियर डॉक्टरों की टीम लगाकर मरीजों की भर्ती व इलाज करना शुरू किया।
इस दौरान कुछ जूनियर डॉक्‍टरों की हड़ताल के दौरान तीमारदारों से मारपीट भी हुई। लोग मिन्‍नतें करते रहे लेकिन जूनियर डॉक्‍टर्स ने किसी की नहीं सुनी। यहां तक कि गंभीर मरीजों को भी दाखिल नहीं दिया गया। कई गंभीर मरीज बिना इलाज के लौट गए। पुलिस और अस्पताल प्रशासन के काफी कोशिश के बाद भी जूनियर डाक्टर हड़ताल खत्‍म करने को राजी नहीं हुए।