केजीएमयू की फाइल फोटो
लखनऊ. सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने उन फिसड्डी छात्रों की किस्मत बदल दी है, जो अभी तक सूबे के किसी भी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए भटक रहे थे। डॉक्टर बनने की आस छोड़ चुके अब ऐसे 65 छात्रों को प्रदेश के टॉप मोस्ट और देश में टॉप फाइव में आने वाली किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई का मौका मिल गया है। मंगलवार को प्रस्तावित विशेष आवंटन के जरिए इन सीटों को भरा जाएगा।
बताते चलें कि केजीएमयू में काउंसिलिंग के शुरुआत से प्रवेश को लेकर मारा-मारी रहती है। ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि यहां पर पढ़ने वाले छात्र बेहतर डॉक्टर बन कर निकलते हैं या फिर फिसड्डी छात्र। फिलहाल इतना तो तय है कि चिकित्सा संस्थान को इन छात्रों को टॉपर छात्रों के समकक्ष लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ेगा।
केजीएमयू देश के मेडिकल संस्थानों में टॉप फाइव में है शामिल
अभी हॉल ही में केजीएमयू को एक सर्वेक्षण के दौरान देश के मेडिकल संस्थानों में टॉप फाइव का दर्जा प्राप्त हुआ है। दूसरे संस्थान के इतिहास को देखते हुए यूपी में मेडिकल की पढ़ाई के इच्छुक छात्रों की पहली इच्छा केजीएमयू में प्रवेश लेने को लेकर रहती है।
मानकों पर खरा नहीं उतरने से सीटों में हुई थी कटौती
संस्थान में एमबीबीएस की कुल 250 सीटें हैं। इनमें मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने मानकों को ध्यान में रखते हुए 65 सीटों की कटौती कर दी थी। इसके बाद संस्थान की 185 सीटें पहले चरण की काउंसिलिंग के दौरान दूसरे दिन ही भर गई थी। बाकी बची 65 सीटों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के चलते इन सीटों पर प्रवेश नहीं हो सका था।
बताते चलें कि चिकित्सा शिक्षा विभाग की तरफ से तीसरे चरण की काउंसिलिंग भी पूर्व में संपन्न करा ली गई है। ऐसे में सु्प्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद उन छात्रों के भाग्य के द्ववार खुल गए हैं, जो अभी तक प्रवेश को लेकर भटक रहे थे।
मंगलवार को विशेष आवंटन से भरी जाएंगी सीटें
इन छात्रों को मंगलवार को प्रस्तावित विशेष आवंटन के जरिए शामिल होने का मौका दिया जाएगा। ये वे छात्र हैं जिनको मेरिट के आधार पर काउंसिलिंग के दौरान एमबीबीएस की बात तो दूर बीडीएस, बीएचएमएस और बीएएमएस में भी दाखिले का मौका नहीं मिल सका है।
आगे पढ़िए सीटों की कटौती के चलते कई टॉपर छात्र नहीं ले सके केजीएमयू में एडमिशन…