केजीएमयू की फाइल फोटो
लखनऊ. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय को काफी राहत दे दी है। एमसीआई द्वारा एमबीबीएस की 250 सीटों में से 65 सीटों की कटौती किए जाने के बाद से यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था। कोर्ट ने अपने आदेश के तहत 30 सितंबर तक काउंसिलिंग के माध्यम से इन सीटों को भरने का आदेश दिया है। वहीं, आदेश की कॉपी नहीं मिल पाने की वजह से पूरे मामले पर चिकित्सा शिक्षा विभाग अभी कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आदेश की कॉपी आने के बाद ही इस मसले पर निर्णय लिया जाएगा।
बताते चलें कि केजीएमयू में एमबीबीएस के तहत पूर्व में कुल 250 सीटें थी। मई महीने में मानकों के निरीक्षण के लिए विवि के दौरे पर आई मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम ने विवि में 250 सीटों के व्याख्यान कक्ष नहीं होने की बात का जिक्र अपनी रिपोर्ट में किया था। इस पर एमसीआई की कार्य परिषद ने 250 के स्थान पर 185 सीटें कर दी थी। इस आदेश के खिलाफ विवि की तरफ से इलाहाबाद हाइकोर्ट में रिट दाखिल कर इसपर रोक लगाने की मांग की गई थी। याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विवि को राहत देते हुए एमसीआई के आदेश पर रोक लगा दी थी।
आदेश पर रोक लगने के बाद एमसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर हाइकोर्ट के आदेश को खारिज करने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए विवि प्रशासन से अपना पक्ष रखने का मौका देते हुए यह भी कहा था कि इस बाबत विवि की तरफ से क्या कदम उठाए जा रहे हैं, इससे भी कोर्ट को अवगत कराए। जिस पर विवि की तरफ से अपना पक्ष कोर्ट के सामने रखा गया था। याचिका पर सुनवाई के दौरान गुरुवार को कोर्ट ने एक आदेश जारी कर 65 सीटों पर काउंसिलिंग कराए जाने का आदेश दिया है।
सीटों को भरने के लिए माथापच्ची शुरू
इन 65 सीटों पर दाखिले के लिए विभागीय स्तर पर माथा-पच्ची शुरू हो गई है। तीसरे चरण की काउंसिलिंग समाप्त होने के बाद चौथे चरण की काउंसिलिंग में ही यह सीटें भरी जाएंगी, लेकिन इन सीटों को लेकर मेधावियों का नुकसान होना तय है। रैंकिंग के हिसाब से जिन छात्रों को दूसरे कॉलेजों में दाखिला मिल गया है और पूर्व में उन्होंने केजीएमयू मे दाखिले की इच्छा व्यक्त की थी, उनका नुकसान तय है। दूसरे विभाग स्तर पर मेरिट या फिर काउंसिलिंग इसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। फिलहाल विभाग आदेश की प्रतीक्षा कर रहा है।
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