केजीएमयू की फाइल फोटो।
लखनऊ. इलाज को लेकर चिकित्सा के क्षेत्र में नित हो रहे अनुसंधान के बीच पैराप्लीजिया जैसे गंभीर बीमारी के इलाज के लिए किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में स्टेम सेल बैंक खोलने को लेकर अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। नौ करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित स्टेम सेल बैंक का प्रस्ताव अभी पिछले माह ही चिकित्सा संस्थान द्वारा शासन को भेजा गया है, लेकिन इस पर मुहर लगना अभी बाकी है। हालांकि, केजीएमयू द्वारा की गई इस पहल पर शासन ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। प्रस्ताव पर अनुमोदन मिलने के बाद शताब्दी अस्पताल के फेज टू में स्थानांतरित होने वाले ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के तहत बैंक को स्थापित किया जाएगा।
ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रो. तुलिका चंद्रा ने बताया कि आने वाले दिनों में यदि शासन इस प्रस्ताव पर मुहर लगा देता है तो यह पूरे देश में सरकारी सेक्टर में खुलने वाला पहला स्टेम सेल बैंक होगा। ऐसे में यहां पर रिसर्च से लेकर पैराप्लीजिया जैसे गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों का इलाज करने में आसानी होगी। अभी तक देश में स्टेम सेल बैंक निजी क्षेत्र में ही स्थापित हैं, जहां इलाज को लेकर मनमर्जी पैसे मरीजों से लिए जाते हैं। संस्थान द्वारा शासन को भेजे गए प्रस्ताव में स्टेम सेल बैंक खोलने और रिसर्च फैकल्टी को स्थापित करने की मांग की गई है।
संस्थान को होगा काफी फायदा
स्टेम सेल बैंक को संचालित करने से सबसे ज्यादा फायदा चिकित्सा संस्थान को है। इसके पीछे सबसे बड़े वाहक के रूप में संस्थान का अपना स्त्री और प्रसूति रोग विभाग है, जहां प्रतिदिन औसतन 35 से 50 प्रसव कराए जाते हैं। बैंक के खुलने से क्वीन मैरी अस्पताल के सहयोग से काफी बड़ी मात्रा में स्टेम सेल एकत्र किए जा सकते हैं। स्टेम सेल का कलेक्शन होने के साथ ही निजी बैंकों पर लगाम लगाई जा सकती है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों के मुताबिक, देश के अधिकांश राज्यों में स्टेम सेल बैंक हैं, जहां रोगियों के इलाज में सेल की उपलब्धता आसानी से हो जाती है। वर्तमान समय में ब्लड बैंक क्वीन मैरी अस्पताल में प्रसव के दौरान स्टेम सेल कलेक्शन का काम कर तो रहा है, लेकिन पूरी तौर पर सक्रियता नहीं है। बैंक के पास सेल स्टोरेज और अन्य प्रक्रियाओं के लिए संसाधनों का अभाव है। इसके लिए ब्लड बैंक के पास अपना अलग सेटअप होना बहुत जरूरी है।
आगे पढ़िए कैसे बनते हैं स्टेम सेल और क्या होता है पैराप्लीजिया रोग…