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लैकफेड घोटाला: सात अभियुक्‍तों को जेल, जीएम पर लगा एक करोड़ रुपए का जुर्माना

6 वर्ष पहले
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लखनऊ. करोड़ों रुपए के लैकफेड घोटाले में भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम के तहत गठित विशेष अदालत ने गुरुवार को सात अभियुक्‍तों को सजा सुनाई है। इनमें तत्‍कालीन जीएम ब्रहम प्रकाश सिंह को 10 साल की सजा और एक करोड़ 30 लाख रुपए का जुर्माना सुनाया है। साथ ही तत्‍कालीन एमडी पंकज त्रिपाठी पर 10 साल की सजा और 90 लाख रुपए का जुर्माना ठोंका है। इसी मामले में तत्‍कालीन मुख्‍य इंजीनियर गोविंद शरण श्रीवास्‍तव को भी 10 साल की सजा और 90 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।

इसी क्रम में दो अन्‍य इंजीनियरों दिनेश कुमार साहू और अजय कुमार दोहरे को सात साल की सजा सुनाई गई है। साथ ही साहू पर 50 लाख एवं दोहरे पर 25 लाख रुपए का जुर्माना भी ठोंका गया है। लैकफेड के एक‍ अन्‍य इंजीनियर संजय कुमार को 5 साल की कैद सुनाई गई है और 5 लाख रुपए का जुर्माना भी ठोंका गया है। सातवें अभियुक्‍त अनिल कुमार अग्रवाल जो कि उस समय अकाउंटेंट के पद पर था, उसे कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई है और सात हजार रुपए का जुर्माना भी ठोंका है।

विशेष जज लल्‍लू सिंह ने इसी मामले में सात अन्‍य अभियुक्‍तों को बाइज्‍ज्‍त बरी कर दिया था। इनमें बसपा शासन के चार पूर्व मंत्री, एक सेवानिवृत्‍त आईएएस अफसर और अन्‍य शामिल थे। लैकफेड में कुल 15 मुल्जिमों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था। 14 मुल्जिमों के भाग्‍य का फैसला हो चुका है लेकिन 15वें मुल्जिम सुशील कटियार के ट्रॉयल पर हाईकोर्ट से स्‍टे चल रहा है। बीते 9 जनवरी को इन सातों मुल्जिमों को कोर्ट ने दोषी पाया था और सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए सातों को जेल से गुरुवार को तलब किया था। कोर्ट ने 14 इं‍जीनियरों के खिलाफ भी प्रथम दृष्‍टया साक्ष्‍य पाते हुए उन्‍हें भी ट्रॉयल के लिए तलब किया है।
717 पन्‍ने का था फैसला

जज लल्लू सिंह ने अपने 717 पेज के फैसले में कहा है कि इस केस की विवेचना से स्पष्ट होता है कि जांच कार्यों से जुड़े व्यक्तियों द्वारा गंभीर लापरवाही बरती गई है। इससे अभियुक्तों के मौलिक अधिकारों का हनन होता है। कोर्ट ने विवेचक पर विवेचना को गलत दिशा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि केस डायरी पढ़कर आश्चर्य होता है। ऐसे में कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि विवेचकगण व्यक्तिगत कारणों से प्रभावित थे। कोर्ट ने विवेचक द्वारा स्कैम में शामिल अन्य इंजीनियरों को आरोपपत्र में अभियुक्त नहीं बनाए जाने पर रोष व्यक्त किया। कोर्ट ने कहा कि करीब 14 इजीनियरों ने बतौर अभियोजन साक्षी स्वयं अपने बयान में स्कैम में शामिल होने संबधी तथ्य दिए लेकिन दुर्भाग्य से उन्हें विवेचकों ने आरोपित ही नहीं बनाया।

आगे ​पढ़ि​ए कोर्ट ने कहा विवेचक ने की है भयंकर लापरवाही...
विवेचक ने की भयंकर लापरवाही

कोर्ट ने कहा कि कुछ इंजीनियर तो ऐसे हैं, जिनके वेतन से घोटाले के रकम की वसूली की जा रही है। बावजूद इसके उन्‍हें अभियुक्त नहीं बनाया गया है। कोर्ट ने कहा कि विवेचक गंगवार ने अपने कॅरियर के दौरान हजारों विवेचनाएं की होगी। उन्हें भली-भांति ज्ञात होना चाहिए था कि विवेचना किस ओर जा रही है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अपराध की प्रकृति के मुताबिक, विवेचक को साक्ष्य संकलन करना होता हैं। हालांकि, इस मामले में ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा है। विवेचकों ने उस जगह का मुआयना भी नहीं किया, जहां लैकफेड की रकम प्रयोग करने की बात कही गई थी।

साल 2012 में उजागर हुआ लैकफेड घोटाला

साल 2012 मे उजागर हुए इस 300 करोड़ के घोटाले की एफआईआर 21 फरवरी 2012 को लैकफेड के तत्कालीन एमडी ने हुसैनगंज थाने में दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में गोविंद शरण श्रीवास्तव और अनिल कुमार अग्रवाल का नाम था। विवेचना बढ़ने के साथ-साथ अन्य अभियुक्तों के नाम बढ़ते चले गए। जांच पुलिस को-ऑपरोटिव सेल के हाथों में आने के बाद पहला आरेाप पत्र 21 नवंबर 2012 को पेश किया गया। इसके बाद में तीन और आरोप पत्र पेश कर कुल 15 लोगों को आरोपित किया गया।