फाइल फोटो।
- आपूर्ति विभाग की जांच में पकड़ में आई गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी।
- कर चोरी से लेकर गैस चोरी तक का चल रहा है खेल।
- अब गैस कंपनियों से मांगी जा रही जानकारी।
लखनऊ. अक्सर सुनने में आता है कि घरेलू गैस सिलेंडर की कमी हो गई है। लेकिन इस कमी के पीछे स्टॉक और रिफिलिंग का खेल ही कारण नहीं हैं। बल्कि इसके पीछे दूसरे जिलों में सिलेंडर बेचना भी बड़ा कारण बनकर उभरा है। राजधानी के कई बड़े रेस्टोरेंट और मिठाई दुकानदार पड़ोसी जिलों से ब्लैक में कॉमर्शियल सिलेंडरों मंगवाकर इस्तेमाल कर रहे हैं। सीतापुर, रायबरेली और बाराबंकी जैसे जिलों से यह सिलेंडर लाकर राजधानी में खपाए जा रहे हैं। हाल में आपूर्ति विभाग के कुछ होटलों में छापे के बाद हुई जांच में इस खेल का खुलासा हुआ है। अब आपूर्ति विभाग ने सभी गैस एजेंसियों और गैस कंपनियों को पत्र लिखकर प्रकरण में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
जिला आपूर्ति विभाग ने हाल में हुसड़िया, आलमनगर रेलवे कॉलोनी में बड़ी संख्या में घरेलू गैस सिलेंडर पकड़े गए थे। साथ ही कई रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकानों में दूसरे जिलों के व्यावसायिक सिलेंडर भी छापों में पकड़े गए। इसके बाद एडीएम सप्लाई के निर्देश पर पेट्रोलियम कंपनियों ने एक जांच कमेटी गठित की थी। इसमें इंडेन, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के अधिकारियों ने अपने स्तर पर एजेंसी स्तर पर जांच कराई थी।
जारी है टैक्स और गैस की कालाबाजारी
इस जांच में यह बात सामने आई थी कि दूसरे जिलों से सिलेंडर मंगाकर व्यवसाई इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे स्थानीय एजेंसियों को तो घाटा हो ही रहा था। साथ ही गैस की कालाबाजारी और वाणिज्य कर चोरी भी थी। हालांकि जांच के बाद कंपनियों ने किसी एजेंसी पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसकी वजह से टैक्स और गैस की कालाबाजारी जारी रही। इसके बाद अब आपूर्ति विभाग ने सख्ती करते हुए सभी कंपनियों से अब स्पष्टीकरण मांगा है।
जांच में खुली गैस के गोरखधंधे की पोल
जिलापूर्ति विभाग को पिछले काफी समय से राजधानी की तमाम गैस एजेंसियों से शिकायतें मिल रही थीं कि उनके कॉमर्शियल गैस उपभोक्ता गैस सिलेंडरों की मांग लगातार कम कर रहे हैं। जिन मिठाई की दुकानों और रेस्टोरेंट में प्रतिदिन कम से कम तीन कॉमर्शियल सिलेंडरों की खपत थी। वहीं अब यह मांग गिरकर दो से तीन दिन में मात्र एक सिलेंडर की ही खपत रह गई है।
इसके चलते उनके गोदामों में कॉमर्शियल सिलेंडर भरे पड़े हैं और डीलरों की पूंजी भी फंस गई है। इसी शिकायत के बाद गोपनीय जांच कराई गई थी। साथ ही कई रेस्टोरेंट पर छापे भी मारे गए। जांच में पता चला कि पड़ोसी सीतापुर और रायबरेली से कॉमर्शियल गैस सिलेंडर वहां की गैस एजेंसियों की गाड़ी में आते हैं और बिना किसी रसीद के होटलों, मिठाई की दुकानों में बेचकर चले जाते हैं।
आगे पढ़िए सीतापुर से लखनऊ लाकर बेचें जा रहे हैं सिलेंडर...