एलडीए बिल्डिंग की फाइल फोटो
लखनऊ. गोमती नगर विस्तार में जिन भूखडों पर अवैध कब्जा हटाने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) कवायद कर रहा है। इन पर अवैध कब्जा भी लखनऊ विकास प्राधिकरण की शह पर ही हुआ है। यहां पर भूखडों का एलॉटमेंट करीब दस से बारह साल पहले हुआ था, लेकिन अभी तक यहां पर आवंटियों को यहां पर कब्जा नहीं मिल पाया। यह इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि यहां पर बहुत से भूखडों पर लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। वहीं, अब एलडीए इन्हीं आवंटियों को कब्जा दिलाने के लिए विभाग अवैध कब्जाधारियों पर कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है।
बताते चलें कि जो शासनादेश है उसमें साफ लिखा है कि विकास प्राधिकरण के नियंत्रणाधीन भूमि पर अतिक्रमण नहीं होने के लिए सबसे पहले वहां का सहायक अभियंता जिम्मेदार होगा। इसके बाद इसे रोकने की जिम्मेदारी अधिशासी अभियंता की होगी। इसके बाद उस विभाग को देखने वाले संयुक्त सचिव की होगी जो सुपरवाइजरी का काम करते हैं।
वहीं, दूसरी ओर इन शासनादेश के बाद भी अतिक्रमण होता रहा और अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। करीब दस साल बीत गए, लेकिन अधिकारी अवैध कब्जों को खाली नहीं करवा सके। इस मामले में अब संयुक्त सचिव रणविजय सिंह की की नियुक्ति के बाद एक बार फिर इसके लिए कवायद की जा रही है।
शासनादेश में सजा और जुर्माने का है प्रावधान
आवटियों को कब्जा नहीं मिलने पर 23 मार्च 1998 को एक शासनदेश भी आया था, जिसमें साफ लिखा था कि यदि कोई सार्वजनिक जगह और प्राधिकरण की जगह पर अतिक्रमण करता है तो यह एक संज्ञेय अपराध होगा। साथ ही इसमें एक साल तक की सजा और बीस हजार रुपए जुर्माना भी हो सकता है।
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