प्रतीकात्मक तस्वीर
लखनऊ. राजधानी में दो लाख से अधिक बिजली उपभोक्ता ऐसे हैं, जिनका पता लेसा नहीं ढूंढ पा रहा है। परिणाम स्वरूप इन उपभोक्ताओं की बिलिंग तो हो रही है, लेकिन बिल जमा नहीं हो रहा है। इन उपभोक्ताओं का पता लगाने के लिए लेसा अफसर एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं, लेकिन पता नहीं चल पा रहा है। लेसा के जानकारों की माने तो अधिकतर वह उपभोक्ता हैं, जो अधिक बिल होने के बाद अभियंताओं और कर्मचारियों की सांठगांठ करके उसी परिसर में दूसरा कनेक्शन ले लिए हैं।
लेसा ने राजधानी में सभी डिवीजनों में फीडर स्तर पर प्रति पोल कनेक्शनों की गणना निजी एजेंसी से कराई है। आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान समय में लेसा के पास कुल आठ लाख 35 हजार छोटे-बड़े उपभोक्ता हैं। इनमें साढ़े चार लाख उपभोक्ताओं की हो रही है, लेकिन बिल सिर्फ ढाई से तीन लाख उपभोक्ताओं का जमा होता है। प्रतिमाह नियमित बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या दो लाख के आसपास ही है। डेढ़ लाख में करीब 50 हजार उपभोक्ता ऐसे ,हैं जिनका बिल छह से सालभर की अवधि में एक बार जमा होता है।
तीन लाख उपभोक्ताओं की नहीं हो पा रही बिलिंग
करीब तीन लाख उपभोक्ताओं की बिलिंग काफी दिनों से नहीं हो पा रही है। निजी एजेंसी के सर्वे के बाद आई रिपोर्ट को देखकर लेसा के अफसर सकते में आ गए। इसमें करीब दो लाख उपभोक्ताओं का कोई पता नहीं चल पा रहा है। लापता उपभोक्ताओं में अधिकतर उपभोक्ता पुराने लखनऊ क्षेत्र के अमीनाबाद, चौक, ठाकुरगंज, आलमबाग डिवीजनों के है। इसके अलावा हुसैनगंज, कानपुर रोड, सेस प्रथम, द्वितीय, मोहनलालगंज, बख्शी का तालाब डिवीजनों में तमाम उपभोक्ता ढूंढे नहीं मिल पा रहे है।
इन क्षेत्रों में इतनी बिलिंग
अमीनाबाद डिवीजन में 23 हजार उपभोक्ताओं में सिर्फ 17 हजार उपभोक्ताओं की बिलिंग हो रही है। इसी तरह ठाकुरगंज में 38 हजार उपभोक्ताओं में 24 हजार उपभोक्ताओं के बिल बन रहे है। इसी तरह हुसैनगंज में 24 हजार उपभोक्ताओं में 18 हजार, राजाजीपुरम में 28 हजार में 25 हजार, ऐशबाग में 32 हजार में 24 हजार, आलमबाग में 33 हजार में 28 हजार, कानपुर रोड में 28 हजार में 20 हजार, सेस प्रथम में 21 हजार में 18 हजार, सेस द्वितीय में 27 हजार में 20 हजार, मोहनलालगंज में 21 हजार में 18 हजार उपभोक्ताओं की बिलिंग हो रही है। इसी तरह डालीगंज, बख्शी का तालाब, चिनहट डिवीजनों में भी चार से पांच हजार उपभोक्ताओं की बिलिंग नहीं हो पा रही है।
आगे पढ़िए अभियंताओं और कर्मचारियों की मिली भगत से ले लिया दूसरा कनेक्शन...