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सावधान! लखनऊ में खेती की जमीन को आबादी में बदलवाकर ठग रहे भूमाफिया

7 वर्ष पहले
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लखनऊ डेवलेप्मेंट अथॉरिटी (एलडीए) भवन लखनऊ (तस्वीर में)
  • कहां चल रहा है अवैध प्लाटिंग का यह खेल
  • कैसे बेची जा रही हैं राजधानी में जमीनें
  • कानून का हो रहा है गलत इस्तेमाल
लखनऊ. लोकायुक्त की जांच में खेती की जमीन को आबादी में बदलकर प्लाटिंग करने का खुलासा होने के बाद हड़कंप है। जिला प्रशासन पिछले पांच साल के ऐसे मामलों की जांच कर रहा है, जिसमें खेती की जमीन को धारा-143 के तहत आबादी घोषित किया गया है। भूमाफिया इसी तरह लोगों को गुमराह कर अवैध प्लाटिंग कर जमीन बेच रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, लखनऊ विस्तार को देखते हुए भूमाफिया अवैध प्लाटिंग का खेल खेल रहे हैं। इसके लिए पहले खेती की जमीन को किसानों से कम दामों पर खरीद लेते हैं। इसके बाद उसे धारा-143 के अंतर्गत आबादी में परिवर्तित करवा लेते हैं। आबादी घोषित होते ही उस जमीन की कीमत बढ़ जाती। इसके बाद उस पर प्लाटिंग करके लोगों को ज्यादा दामों में बेचा जाता है। इसको लेकर लोगों को यह बताया जाता है कि जो प्लॉट उन्हें दिया जा रहा है, वह पूरी तरह से वैध हैं, क्योंकि उसका लैंडयूज परिवर्तित करवा लिया गया है।

कहां चल रहा है अवैध प्लाटिंग का यह खेल
अवैध प्लाटिंग का यह खेल राजधानी के पास बाराबंकी रोड, सुल्तानपुर रोड, कानपुर रोड, कुर्सी रोड, जैतीखेडा के आसपास वाली जमीनों पर जमकर खेला जा रहा है। इसके साथ ही इनका लेआउट भी पास नहीं कराया जाता है। भूमाफिया गुमराह करने के लिए यह दलील देते हैं कि खेती की जमीन का यदि धारा-143 के अंतर्गत लैंड चेंज करवा लिया गया है, तो वह उसपर मनमाने तरीके से निर्माण कर सकते हैं। जबकि नियमों के मुताबिक ऐसा नहीं हो सकता।
क्या कहते हैं एलडीए के आवंटी
एलडीए में जमीन के मामले को लेकर आए राजेश श्रीवास्तव कहते हैं कि उन्होंने जैतीखेड़ के पास एक प्लाट खरीदा था। इसके बाद जब पता लगाया इसका लेआउट ही नहीं पास है। अब वह अपने पैसे वापस लेने के लिए चक्कर लगा रहे हैं।
आगे पढ़िए, कैसे बेची जा रही हैं राजधानी में जमीनें...