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अकाल पड़ने पर अवध के इस नवाब ने बनवाया था इमामबाड़ा, जानि‍ए क्‍या है खासि‍यत

8 वर्ष पहले
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असाफाई इमामबाड़ा स्‍थि‍त भूलभुलैया।
वर्ल्‍ड हेरिटेज वीक स्पेशल: 19 से 25 नवंबर तक पूरी दुनिया में ‘वर्ल्‍ड हेरिटेज वीक’ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर dainikbhaskar.com यूपी के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों और इमारतों आदि से संबंधित रोचक तथ्यों और तस्वीरें से पाठकों को रूबरू कराएगा। इसकी कड़ी में हम जानकारी दे रहे हैं नवाबी नगरी यानी लखनऊ स्‍थि‍त इमामबाड़े के बारे में।
लखनऊ. भूलभुलैया! यह शब्‍द सुनते ही मन में रोमांच आने लगता है। कि‍सी ऐति‍हासि‍क धरोहर में घुसकर खो जाने को मन मचल उठता है। कुछ ऐसी ही खासि‍यत है लखनऊ में मौजूद 'असाफाई इमामबाड़े' की। जी हां, यह वही जगह है जहां से बि‍ना खोए आप वापस आना चाहते हैं। हालत यह है कि‍ यहां घुसते ही मजबूत दि‍लवाला भी घबरा जाता है।
हम बात कर रहे हैं 1784 ई. में आसफउद्दौला द्वारा बनवाए गए इमामबाड़े की। इस भवन में तीन विशाल कक्ष हैं, इसकी दीवारों के बीच छुपे हुए लंबे गलियारे हैं, जो लगभग 20 फीट मोटी हैं। यह घनी, गहरी रचना भूलभुलैया कहलाती है। इसमें केवल तभी जाना चाहिए जब आपका दिल मजबूत हो।
इसमें 1000 से अधिक छोटे-छोटे रास्‍तों का जाल है। इनमें से कुछ के सिरे बंद हैं और कुछ प्रपाती बूंदों में समाप्‍त होते हैं। कुछ अन्‍य प्रवेश या बाहर निकलने के बिंदुओं पर समाप्‍त होते हैं। यदि आप इस भूलभुलैया में खोए बिना वापस आना चाहते हैं तो गाइड की सहायता लेना बेहतर होता है।
आगे पढ़ि‍ए क्‍या कहते हैं इति‍हासकार...