मेरठ से आए सुरेश महोत्सव में अपनी साड़ी के स्टॉल पर।
लखनऊ. लखनऊ महोत्सव की रौनक खत्म हो चुकी है। बीते रविवार को महोत्सव में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आखिरी शाम थी। हालांकि, प्रशासन ने महोत्सव तीन दिनों के लिए बढ़ा दिया है। इस दौरान सिर्फ दुकानें ही खुली रहेंगी। प्रशासन के इस कदम के बावजूद दुकानदारों में मायूसी है। उनका मानना है कि इस बार लोगों ने कोई बहुत ज्यादा खरीददारी नहीं की। वहीं, प्रशासन की व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं रही। कई दुकानदार यहां स्टॉल लगाना घाटे का सौदा बता रहे हैं और दोबारा आने से तौबा कर रहे हैं।
महोत्सव में स्टॉल लगाए दुकानदार प्रशासन से भी काफी नाराज दिख रहे हैं। उन्हें इस बार किए गए इंतजाम को लेकर काफी रोष है। कई दुकानदारों की शिकायत है कि हस्तशिल्प विभाग से कार्ड मिलने के बावजूद उनसे स्टॉल लगाने के लिए पैसे लिए गए। यहां सफाई और पानी की व्यवस्था बहुत खराब रही। स्टॉल से सामान भी चोरी हो रहा है। वहीं, अफसरों ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
हस्तशिप विभाग के कार्ड के बावजूद स्टॉल लगाने के लिए लिया गया पैसा
भदोही के रहने वाले सलीम लखनऊ महोत्सव में स्टॉल लगाए हुए हैं। उनका कहना है कि उन्हें हस्तशिल्प विभाग से कार्ड मिला है। इस वजह से उन्हें हर बार महोत्सव में फ्री स्टॉल लगाने की जगह मिलती थी, लेकिन इस बार प्रशासन ने उनसे 50 हजार रुपए स्टॉल लगाने के लिए हैं। इतने रुपए देने पर उन्हें उन्हें 27 बाई 30 फिट की जगह मिलनी चाहिए लेकिन प्रशासन ने उन्हें 11 बाई 15 फिट की जगह दी है।
उन्होंने बताया कि जो जगह उन्हें दी गई है, वह मेले के लेआउट में सरकारी शिल्पकार के लिए आरक्षित है। इसके बावजूद जिला प्रशासन ने उनसे पैसे भी लिए हैं। वहीं, दूसरी तरफ बिक्री भी नहीं हो रही है। लोग सामान देखने तो आ रहे हैं, लेकिन रेट पूछने के बाद खरीददारी नहीं कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें काफी घाटा उठाना पड़ रहा है।
आगे पढ़िए, सफाई की नहीं है कोई व्यवस्था...