तस्वीर में: सुनिता तिवारी।
लखनऊ. डयूटी से लौटते वक्त सुनीता ने देखा कि तीन लोग एक लड़की के साथ अभद्रता कर रहे हैं। वो अकेले ही उनसे भीड़ गई। उसने लड़की को युवकों के चंगुल से छुड़वाया और दो लोगों को पकड़वाकर जेल भिजवा दिया। इसमें से एक विजिलेंस में तैनात दिनेश सिंह बिष्ट भी थे। सुनीता का कहना है कि उस समय दिमाग में केवल यही चल रहा था कि कैसे भी करके उस युवती को बचाना है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को खुद को सुरक्षित रखने के लिए मन और तन दोनों से मजबूत होने की जरूरत है।
शुक्रवार को मुलायम सिंह और अपर्णा यादव के हाथों सम्मान पाकर लखनऊ की मर्दानी सुनीता तिवारी कहती हैं कि उन्हें बहुत खुशी और गर्व हो रहा है कि वह किसी की मदद कर सकीं। अगर वे मदद नहीं करती तो शायद खुद को माफ नहीं कर पाती। वे बताती हैं कि ऐसे लोगों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। हालांकि, हाथापाई में उन्हें भी चोट लगी। उनके इस बहादुरी के बाद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने उन्हें बधाई दी। वहीं, उनकी बहू अपर्णा यादव ने हर्ष संस्था की ओर से उनका सम्मान भी किया। dainikbhaskar.com की ' ने लखनऊ की मर्दानी से से खास मुलाकात की।
जनता के रक्षक हैं, भक्षक नहीं
पूरे प्रकरण पर बोलते हुए सुनीता कहती हैं कि पुलिस वाले जनता के रक्षक हैं। वे ही भक्षक बन जाएंगे तो कैसे काम चलेगा? जब उन्हें पता चला कि एक विजिलेंस में इंस्पेक्टर है तो लगा कि ऐसे लोगों को तो जरूर सजा होनी चाहिए।
महिलाएं डॉयल करे 100 नंबर
जिस तरह इस घटना को देखते ही तुरंत 100 नंबर डॉयल किया, उसी तरह महिलाओं को भी बिना डरे 100 नंबर डॉयल करके पुलिस की मदद लेनी चाहिए। बिना किसी हिचक और शर्म के थानों पर जाकर रिपोर्ट दर्ज कराएं। ताकि ऐसे लोगों पर अंकुश लगाई जा सके।
आगे पढ़िए सुनीता ने कहा- मन के साथ तन को करे मजबूत...