लखनऊ. सीएम अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट में अड़चनों का दौर शुरू होने वाला है। शहर में मेट्रो चलाने के लिए केंद्र सरकार के पब्लिक इंवेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) की मंजूरी मिलने में देरी हो रही है। ऐसे में काम पूरा नहीं होने के कारण मेट्रो चलाने की डेडलाइन में भी बदलाव आ सकते हैं। मेट्रो के अधिकारियों को 31 मार्च तक पीआईबी की मंजूरी मिलने की उम्मीद है। वहीं, यह बात भी सामने आ रही है कि मेट्रो के लिए रोलिंग स्टॉक सप्लाई करने वाली कंपनियों ने 92 हफ्ते का समय मांगा है। ऐसे में समय पर काम पूरा नहीं होने पर दिसंबर 2016 तक मेट्रो चलाने की योजना पर पानी फिर सकता है।
सीएम अखिलेश लखनऊ मेट्रो के प्रोजेक्ट के लिए काफी गंभीर हैं। उन्होंने मेट्रो के लिए पैसे की कमी नहीं होने की बात कई बार दोहराई है। इसके बावजूद इस पूरी प्रक्रिया में कई अड़ंगे भी लग रहे हैं। इनमें पहली समस्या यह है कि रोलिंग स्टॉक सप्लाई करने वाली कंपनियों को 950 करोड़ की पेमेंट भारतीय मुद्रा में नहीं की जा सकती है। यह पेमेंट विदेशी मुद्रा में ही होनी चाहिए। ऐसे में लखनऊ मेट्रो के प्रोजेक्ट के लिए विदेशी फंडिंग एजेंसी से पैसा लेना मजबूरी है। हालांकि, पब्लिक इंवेस्टमेंट बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद ही यह पैसे मिल सकते हैं। वहीं, यह मंजूरी पिछले कई महीनों से लटकी पड़ी है। इसके चलते लखनऊ मेट्रो को विदेशी, यूरोपियन इंवेस्टमेंट बैंक और फ्रांस की एएफडी से दोबारा बात करनी पड़ रही है।
66 कंपनियों ने मांगा 92 हफ्ते का समय
रोलिंग स्टॉक सप्लाई करने के लिए कुल 18 कंपनियों ने टेंडर डॉक्यूमेंट खरीदा है। इसमें अधिकतर कंपनी विदेशी है। इन सभी कंपनियों ने टेंडर फाइनल होने के लिए 92 हफ्ते समय मांगा है। उनका तर्क है कि देशभर में मेट्रो के रैक सप्लाई करने में इतना ही समय लगता है। वहीं, एलएमआरसी ने कंपनियों को केवल 66 हफ्तों का समय दिया है।
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