लखनऊ. नगर निगम ने सिर्फ चार साल में आवारा पशुओं को पकड़ने में 128221 लीटर पेट्रोल फूंक दिया। हालांकि, उसे इस बात की जानकारी नहीं है कि तेल का दाम कितना है। यह खुलासा एक RTI में हुआ है, जिसमें पूछा गया था कि 2012 से 2015 तक आवारा पशुओं को पकड़ने वाली गाड़ियों पर कितना पैसा खर्च किया गया।
नगर निगम ने क्या दिया जवाब?
- नगर निगम ने RTI के जवाब में बताया कि उसने चार सालों में 128221 लीटर ऑयल आवारा पशुओं को पकड़ने वाली गाड़ियों पर खर्च किया है।
- हालांकि, अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि इसमें कितना पैसा खर्च किया गया।
- उनका कहना है कि ऑयल के दाम घटते-बढ़ते रहते हैं। इस वजह से रुपयों का हिसाब-किताब नहीं बता सकते।
ये है चार साल का ब्यौरा
- नगर निगम की जानकारी के मुताबिक, उसने 2012 में दो महीने के दौरान 9470 लीटर ऑयल आवारा पशुओं की गाड़ियों में फूंका।
- वहीं, 2013 में 39946 लीटर डीजल खर्च किया, जबकि 2014 में 39997 लीटर।
- 2015 में 38808 लीटर तेल गाड़ियों में डाला गया।
नगर निगम से क्यों मांगा था जवाब?
- आरटीआई के तहत जानकारी मांगने वाले शमीम अहमद ने बताया कि उनके मोहल्ले में अक्सर आवारा पशु घूमते रहते हैं।
- कुछ दिनों पहले एक बच्चे को आवारा सांड ने कुचल दिया था, जिससे उसकी मौके पर मौत हो गई थी।
- इसके बाद नगर निगम से पूछा कि उसने पशु चिकित्सा अधिकारी एके राव के कार्यकाल में आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए कितनी गाड़ियों पर खर्च किया है।
क्या होता है सूचना का अधिकार (RTI)
- सूचना का अधिकार अधिनियम भारत की संसद द्वारा पारित एक कानून है, जो 12 अक्टूबर 2005 को लागू हुआ।
- यह कानून भारत के सभी नागरिकों को सरकारी फाइलों/रिकॉर्ड्स में दर्ज सूचना को देखने और उसे प्राप्त करने का अधिकार देता है।
- जम्मू और कश्मीर को छोड़कर भारत के सभी भागों में यह अधिनियम लागू है।