फोटो: रेडियो टैक्सी, लखनऊ।
लखनऊ: दिल्ली में एक युवती के साथ टैक्सी ड्राइवर द्वारा रेप किए जाने की घटना ने पूरे देश में खलबली मचा दी। आरोपी ने घटना को उस वक्त अंजाम देकर फरार हो गया, जब एक एनजीओ में कार्यरत युवती टैक्सी में सवार होकर घर वापस लौट रही थी। इस घटना के बाद सोमवार को dainikbhaskar.com की टीम ने यूपी की राजधानी लखनऊ में रेडियो टैक्सी के सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया। इस बाबत शहर के रेडियो टैक्सी के संचालक आशुतोष मिश्रा ने अपनी कंपनी द्वारा प्रदान की जा रही सुरक्षा मानकों के बारे विस्तृत जानकारी दी।
आशुतोष मिश्रा ने बताया कि दिल्ली में अमेरिकन कंपनी द्वारा संचालित रेडियो टैक्सी की अपेक्षा लखनऊ की टैक्सी अधिक सुरक्षित है। लखनऊ में चलने वाली रेडियो टैक्सी के हर पल की खबर कंट्रोल रूम से ली जाती रहती है। किसी भी संदिग्ध परिस्थिति में कंट्रोल रूम में बैठा टेक्निशियन तुरंत ड्राइवर से संपर्क करता है और उससे मौके की परिस्थिति जानता है और संदेह होने पर तुरंत आपात स्थिति से निपटने के लिए किए जाने वाले उपाय करता है। यदि यह सिस्टम दिल्ली के यूबर कैब में होती तो टैक्सी ड्राइवर गाड़ी में बैठी महिला से रेप कर फरार नहीं हो पाता।
दिल्ली के यूबर और लखनऊ की रेडियो टैक्सी में ये हैं अंतर
दिल्ली में यूबर कंपनी द्वारा संचालित रेडियो टैक्सी और लखनऊ की रेडिओ टैक्सी में सबसे बड़ा अंतर यह है कि यूबर के टैक्सी ड्राइवर के पास रखे
मोबाइल फोन में जीपीएस सिस्टम लगा होता है, जबकि लखनऊ की रेडियो टैक्सी में गाड़ी के अंदर ही जीपीएस सिस्टम लगा होता है। यह हर परिस्थिति में अपनी लोकेशन बताता रहता है। जहां कहीं भी टैक्सी रहेगी वहीं की लोकेशन मिलेगी इससे चाह कर भी ड्राइवर कोई मनमानी नहीं कर सकता है।
वेरीफिकेशन मामले में पुलिस है काफी सुस्त
आशुतोष मिश्रा ने बताया कि जब भी हम किसी ड्राइवर को भर्ती करते हैं तो उसके समस्त कागजात पुलिस को दे देते हैं। फिर कुछ दिन बाद जाकर पूछताछ करते हैं। हालांकि, पुलिस अक्सर इसका सही उत्तर नहीं देती है। लिहाजा वह खुद ही जाकर यह पता करते हैं कि यह ड्राइवर रखने लायक है या नहीं। उन्होंने कहा कि ड्राइवर के वेरीफिकेशन के मामले में पुलिस सबसे ज्यादा सुस्त है। ऐसे में इस बारे में गाड़ी मालिक को ही पुलिस के पीछे पड़कर वेरीफिकेशन करवाना होता है।
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PHOTOS BY: आशुतोष त्रिपाठी।