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तीन दोस्तों का कमाल, अंधेरे में डूबे 1500 गांवों को कर दिया रोशन

7 वर्ष पहले
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लखनऊ. यूपी के हजारों गांवों के लाखों लोगों की जिंदगी सूरज की रोशनी में ही चहलकदमी करती है। लोग लालटेन और दीये की टिमटिमाती रोशनी के सहारे ही अपनी रात बिताते हैं, लेकिन तीन दोस्तों ने 1500 गांवों को रोशन करके लोगों का बरसों पुराना इंतजार खत्म कर दिया। ये तीन दोस्त संदीप पांडेय, निखिल जयसिंघानी और यूएस के रहने वाले ब्रीयन शाद हैं। इन्होंने 'मेरा गांव पावर' (एमजीपी) नाम की एक कंपनी बनाई। इसके जरिए उन्होंने पांच जिलों के करीब दो हजार परिवारों के एक लाख लोगों को बिजली देकर उनकी जिंदगी को नए मायने दिए।
साल 2010 में की शुरुआत
मूलरूप से मिर्जापुर के रहने वाले और लखनऊ में पले-बढ़े संदीप पांडेय ने साल 2010 में अपने दोस्त निखिल जयसिंघानी और ब्रीयन शाद के साथ मिलकर ऐसे गांवों को रोशन करने की ठानी, जहां सरकार अब तक बिजली नहीं दे पाई है। उन्होंने पहले सोलर पैनल वाला माइक्रोग्रिड लगाया। उसके बाद कच्चे मकानों में एलईडी बल्ब और चार्जिंग प्वाइंट लगाकर लोगों को केरोसिन से मुक्ति दिलाई। इन तीन दोस्तों ने साल 2011 में सीतापुर जिले के कहारनपुरवा गांव में पहला माइक्रोग्रिड लगाया था। ये लोग अब तक करीब पांच जिलों में 1800 से ज्यादा माइक्रोग्रिड लगा चुके हैं।
लोगों से नहीं लिया जाता पैसा
'मेरा गांव पावर' हर घर में दो एलईडी बल्ब और एक मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट उपलब्ध कराता है। लोगों से बल्ब या तार का पैसा नहीं लिया जाता है। उन्हें बस हर महीने 100 रुपए का भुगतान करना होता है। लोगों की सुविधा के लिए अब इसे 25 रुपए साप्ताहिक कर दिया गया है। शुल्क की वसूली गांव में ही बनाया गया एक विशेष समूह करता है।
केरोसिन से मुक्ति
'मेरा गांव पावर' के सीईओ संदीप पांडेय ने बताया कि आज भी यूपी में लाखों लोग लालटेन और लैंप पर निर्भर हैं। केरोसिन जलाने से इन्हें जितनी रोशनी नहीं मिलती, उससे कहीं ज्यादा शरीर को नुकसान पहुंचता है। कच्चे मकानों में आग भी ज्यादातर इन्हीं से लगती है। 'मेरा गांव पावर' का मकसद लोगों को केरोसिन के नुकसान से मुक्ति दिलाने के साथ ही साफ और सुरक्षित जिंदगी देना भी है।
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