मेट्रो ट्रेन की प्रतीकात्मक फोटो।
लखनऊ. राजधानी में चल रहे रेल इनो-एग्जीविशन में आई 20-25 कंपनियों के सुझाव को माना गया तो लखनऊ मेट्रो चलाने के लिए ड्राइवर की जरूरत नहीं पड़ेगी। कंपनियों ने भारत को एडवांस्ड कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल (सीबीटीसी) सिस्टम मुहैया कराने का प्रपोजल रखा है। इसकी मदद से मेट्रो ट्रेनें बिना ड्राइवर के चलाई जा सकेंगी। इसकी खासियत यह है कि पूरा नियंत्रण एक कंट्रोल रूम में रहता है। वहां से सभी ट्रैकों और ट्रेनों पर नजर रखी जाती है।
कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल सिस्टम यानि सीबीटीसीएस के जरिए 90 से 60 सेकेंड के इंटरवल पर ट्रेनों का संचालन किया जा सकेगा। आरडीएसओ के डायरेक्टर जनरल
पीके श्रीवास्तव ने बताया आरडीएसओ ने इस तकनीक का उपयोग करने का सुझाव लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एलएमआरसी) को दिया गया है। इसके पहले
हैदराबाद मेट्रो और दिल्ली मेट्रो के पांचवें और छठे फेज के लिए भी इस तकनीक के उपयोग का सुझाव दिया गया है।
आरडीएसओ ने दिया एलएमआरसी को सुझाव
आरडीएसओ के डीजी पीके श्रीवास्तव ने बताया कि इस तकनीक के जरिए ट्रेनों का रूट डिसाइड किया जा सकेगा। चालक के बिना ट्रेनों का संचालन करने को लेकर यह टेक्निक लंबी अवधि के लिए है। फ्रांस, जापान, चाइना और स्पेन में कुछ हद तक इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। 160 किमी और 350 किमी प्रति घंटे से अधिक स्पीड में ट्रेनों के संचालन को लेकर यह तकनीक उपयोग में लाई जा सकती है।
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