फाइल फोटो: मोहनलालगंज के प्राइमरी स्कूल के हैंडपंप पर बिखरा खून और (इनसेट में) मृतका।
लखनऊ. लखनऊ के मोहनलालगंज मर्डर केस की तफ्तीश में अब लीपापोती शुरू हो गई है। घटना को हुए तीन महीने से ज्यादा वक्त बीत चुके हैं, लेकिन अब तक जांच में कोई तेजी नहीं आई है। इसी बीच रविवार को पीड़ित परिवार सीएम अखिलेश यादव से मिलने के लिए देवरिया से लखनऊ पहुंचा। सीएम ने पीड़िता के घरवालों को दोबारा सीबीआई जांच के लिए रिमाइंडर देने का भरोसा दिया।
रविवार की शाम सीएम ने अपने आवास पर करीब 15-20 मिनट तक मोहनलालगंज कांड की मृतका के परिजनों से शिष्टाचार मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना। उन्होंने समस्याओं को दूर करने का आश्वासन भी दिया। मृतका के देवर ने बताया कि सीएम ने गोरखपुर डीएम को बच्चों का एडमीशन तत्काल करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में हॉस्टल की सुविधा देने वाले स्कूल को प्राथमिकता देने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि इसका पूरा खर्चा सरकार उठाएगी। इसके साथ ही सीएम ने दोनों बच्चों को स्कूल बैग और किताबें भी दी।
बताते चलें सीएम अखिलेश यादव ने बीते 28 जुलाई को ही सीबीआई जांच के आदेश दे दिए थे। बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं हुई। सीबीआई का कहना था कि अब तक केंद्र सरकार से उसे कोई निर्देश नहीं मिले हैं। लिहाजा जांच की प्रक्रिया नहीं शुरू की जा सकती। ऐसे में मामले को ठंडे बस्ते में डालने की आशंका भी बढ़ गई थी।
महिला के बच्चों को मिला पांच-पांच लाख का डिमांड ड्राफ्ट
महिला के परिजनों ने सीबीआई जांच में देरी होने पर पीएमओ को मेल किया है। वहीं, रविवार की सुबह परिवार को मृतका के दोनों बच्चों के नाम पांच-पांच लाख रुपए का डिमांड ड्राफ्ट मिला है। फिलहाल बच्चों का अभी किसी स्कूल में दाखिला नहीं हुआ है। मृतका के देवर ने बताया कि दोनों बच्चे घर पर ही पढ़ रहे हैं।
आखिर किसे बचाने की की कोशिश हो रही है ?
पुलिस महकमे के सूत्र बताते हैं कि मामले में एक बड़े बिल्डर का नाम सामने आया है। इसके चलते जांच की गति धीमी पड़ गई है। सूत्र बताते हैं कि इस बिल्डर के धंधे में कुछ बड़े सफेदपोश राजनेता और उनके परिवार के सदस्यों का पैसा लगा हुआ है। ऐसे में उसके गिरफ्तार होने से धंधा चौपट होने का खतरा है। इन्ही सब कारणों के चलते मामले की जांच में लीपापोती शुरू हो गई है।
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