फोटो: मंदिर में स्थापित संदोहन देवी की मूर्ति।
लखनऊ. देवी मां भक्तों को दर्शन देने के लिए कब और किस रूप में प्रकट हो जाएं, इसका कोई भी अंदाजा नहीं लगा सकता है। भक्तों का उद्धार करने के लिए मां सपने में आकर उन्हें दर्शन देती हैं। कभी पिंडी रूप धर कर भक्तों को अपना आशीर्वाद देती हैं। कुछ ऐसी ही महत्ता चौक के चौपटियां में स्थित संधोहरण या संदोहन देवी मंदिर की है।
यह मंदिर भक्तों के लिए आस्था का एक बड़ा केंद्र है। मंदिर के मुख्य पंडित ब्रजमोहन लाल शुक्ला के मुताबिक, लगभग 700 साल पहले यहां एक संत हुए थे। मां ने उन्हें सपने में अपने दर्शन दिए थे। सपने में ही देवी मां ने कहा था कि तालाब में मेरी पिंडी को निकाल लिया जाए। इसके बाद संत ने कुछ भक्तों के साथ मिलकर तालाब में पिंडी की तलाश की। आखिरकार तालाब की गहराई में मां की पिंडी मिल गई।
इसके बाद एकादशी को मां की पिंडी की स्थापित की गई। कहा जाता है कि इस पिंडी को जितनी बार बिठाया गया, हर बार पिंडी लेट जाती थी। इसलिए मां की लेटे ही पिंडी की स्थापना की गई। ऐसी मान्यता है कि एकादशी को यहां पर दर्शन करने से भक्त की हर मनोकामना पूरी होती है। मां संदेहरणी या संदोहन यानि हर प्रकार के संदेहों को खत्म करने वाली मां का जिक्र ललिता सहस्त्रनाम में भी आता है।
साल में दो बार होते हैं मां के चरणों के दर्शन
पंडित ब्रजमोहन ने बताया कि साल में दोनों नवरात्र के बाद की एकादशी को ही मां के चरणों के दर्शन होते हैं। इसमें दूर-दूर से सैकड़ों भक्त केवल मां के चरणों के दर्शन करने आते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन दर्शन करने से हर मुराद पूरी होती है। बाकी समय मां के चरण ढके रहते हैं।
आगे पढ़िए, नवरात्र में हर दिन मां का अद्भुत और मनमोहक रूप...