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राजधानी में है भारत का अकेला मंदिर, जहां स्‍थापित हैं काली के साथ विष्‍णु

7 वर्ष पहले
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लखनऊ. राजधानी के चौक इलाके में बड़ी कालीजी मंदिर देश का ऐसा अकेला मंदिर है, जहां भगवान विष्‍णु और काली जी की मूर्तियों को एक साथ स्‍थापित किया गया है। मान्‍यता है कि इसका निर्माण आदि शंकराचार्य द्वारा करीब दो हजार साल पहले किया गया था।

राजधानी में गुइयन देवी, संतोषी देवी, काली बाड़ी, चंद्रिका देवी सहित कई मंदिर हैं। इनमें सबसे खास स्‍थान है चौक स्थित बड़ी काली मंदिर। यह अपने साथ हजारों साल पुराना इतिहास समेटे हुए है जो आज भी भ‍क्‍तों की आस्‍था और विश्‍वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां दूर-दूर से भक्‍त मां के दर्शन करके अपने मन की मुरादें पाते हैं। साथ ही भक्‍त यहां बच्‍चों का मुंडन संस्‍कार करवाने भी आते हैं।

साल में चार बार होते हैं अष्टधातु मूर्ति के दर्शन

मंदिर में हजारों वर्ष पुरानी अष्टधातु की मूर्ति को केवल नवरात्रि में अष्टमी और नवमी को भक्तों के दर्शन के लिए निकाला जाता है। इसे बाद में मंदिर के गर्भगृह में रखा जाता है। मान्यता है कि अष्टधातु मूर्ति के सामने जो भी मन्नत मांगी जाती है वह पूरी होती है। यही वजह है कि नवरात्र की अष्टमी और नवमी को यहां पर आस्था का सैलाब उमड़ता है। यह मूर्ति देखने में अर्धनारीश्वर है। मूर्ति ने धोती और जनेऊ पहन रखी है और माथे पर बिंदी और श्रृंगार किया जाता है।

गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल यहां
मां के दरबार में पिछले 20 साल से ऊपर बसंत लाल नाम का व्यक्ति नगाड़ा बजा रहा है। वैसे है तो वह मुस्लिम समुदाय से है, लेकिन किसी को ठेस न पहुंचे इसीलिए अपना नाम बसंत लाल बताते हैं। कई बार पूछने पर भी अपना असली नाम नहीं बतातें हैं।
तस्‍वीर में: बड़ी कालीजी का मंदिर, जहां स्‍थापित है विष्‍णु और काली एक साथ।