फोटो: स्कंदमाता।
लखनऊ. 'सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया, शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी।' सोमवार को नवरात्रि का पांचवा दिन है। इस दिन देवी दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इनकी गोद में स्कंदकुमार यानि कार्तिकेय विराजमान रहते हैं। मान्यता है कि नवरात्रि में इनकी पूजा करने से भक्त को संतान सुख की प्राप्ति होती है।
स्कंदमाता मोर की सवारी करती हैं। इनकी गोद में बाल स्कंद कुमार बैठे रहते हैं। देवी मां कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसी कारण से इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। संतान सुख के लिए इनका दर्शन करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि पूजा से मां प्रसन्न होती हैं और भक्त की गोद भर देती हैं।
मां की पूजा से मिलता है विशेष लाभ
पंडित राकेश कुमार के अनुसार, मां का ध्यान करके उनका षोडशोपचार और पंचोपचार करना चाहिए। इन्हें सफेद कमल चढ़ाए। स्कंदमाता के सामने लाल कपड़े में सुहाग चिह्न सिंदूर, लाल चूड़ी, महावर, बिंदी रखें। एक कपड़े में सेब, लाल फूल और चावल बांधकर मां की गोद भरें। इसके बाद भोग और आरती करें। इससे कुमारी लड़कियों को मनचाहा वर मिलता है। वहीं, शादी-शुदा महिलाओं को संतान सुख की प्राप्ति होती है।
आगे पढ़िए, स्कंदमाता की पूजा करते वक्त किस मंत्र का करेंगे जाप...