फोटो: देवी चंद्रघंटा।
लखनऊ. 'पिंडज प्रवरारुढा चंडकोपास्त्रकैर्युता, प्रसादम तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।' शनिवार को नवरात्रि का तीसरा दिन है। तीसरे दिन मां भगवती के चन्द्रघंटा स्वरूप की पूजा की जाती है। इनके माथे पर घंटा के समान गोलाकार चंद्रमा विद्यमान है। इनकी पूजा करने से दिव्य शक्ति मिलती है। साथ ही सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।
मां चंद्रघटा के शरीर का रंग सोने की तरह चमकीला है। इनकी तीन आंखें और 10 हाथ हैं। देवी मां अपने हाथों में अस्त्र, शस्त्र, बाण आदि धारण किए हुए हैं। इनका वाहन सिंह है। इसलिए इनकी मुद्रा युद्ध के लिए तत्पर रहने की होती है। इनके घंटे की आवाज से दानव, दैत्य, राक्षस और बुरी शक्तियां दूर हो जाते हैं।
ऐसे करें मां की आराधना
आचार्य राकेश पांडेय के अनुसार, भक्तों को चंद्रघंटा देवी का पूजा के लिए सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनने चाहिए। इसके बाद मन, वचन और कर्म से एकाग्रचित होकर देवी मां का ध्यान करना चाहिए। षोडशोपचार या पंचोपचार से फूल, चंदन, सिंदूर, माला, धूप, दीप से उनकी पूजा करें। इसके बाद नैवेद्य लगाकर मां की आरती करें।
ये मिलेंगे लाभ
भगवती चन्द्रघंटा का ध्यान, स्त्रोत और कवच के पाठ करने से मणिपुर चक्र जाग्रत हो जाता है। इससे सांसारिक परेशानियों से मुक्ति मिल जाती है। मां का उपासक सिद्धि के समान पराक्रमी और निर्भय हो जाता है।
हुई मूर्ति स्थापना
नवरात्रि में मां भगवती भक्तों के घर और पंडालों में विराजती हैं। अलीगंज के नए हनुमान मंदिर में बने पंडाल में दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई। इस दौरान पंडितों ने मंत्रोच्चार के साथ मां की आराधना की। भक्तों ने भी जय माता दी के नारे लगाए। इसके अलावा कई पंडालों को अंतिम रूप देने का काम भी जोर-शोर से चल रहा है।
आगे देखिए, पूजा पंडालों में मूर्ति स्थापना की कुछ अन्य तस्वीरें...