प्रतीकात्मक फोटो।
लखनऊ. वाणिज्यकर विभाग की नोटिस से परेशान राजधानी के लगभग 20 हजार कारोबारी अपना काम-काज बंद करने की तैयारी कर रहे हैं। विभाग में पंजीकृत ये कारोबारी विभिन्न सरकारी और निजी संस्थानों में विभिन्न मांग के अनुरूप आवश्यक सामग्री की सप्लाई देते हैं और इसपर बनने वाले टैक्स का पूरी ईमानदारी के साथ भुगतान भी करते हैं। हालांकि, विभाग में बदले नियमों से ये कारोबारी मकड़जाल में फंस गए हैं। ऐसे में व्यापारी संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों को अपना व्यापार बंद करने की चेतावनी दिए हैं।
सरकारी विभागों में जनरल ऑर्डर की सप्लाई उन्हीं पंजीकृत ठेकेदारों से ली जाती हैं जो वाणिज्यकर विभाग में पंजीकृत होते हैं। इन ठेकेदारों ने पूर्व में जनरल ऑर्डर सप्लाई फर्म के नाम पर पंजीकरण कराया था। विभागों में माल सप्लाई करने के बाद तिमाही जमा होने वाले रिटर्न में ये लोग सप्लाई की जाने वाली वस्तुओं का नाम लिखकर उसपर लगने वाले टैक्स को विभाग में जमा कर रहे थे।
इसी बीच विभाग ने नियमों में बदलाव करते हुए इन ठेकेदारों द्वारा केवल उन्हीं वस्तुओं की सप्लाई किए जाने की अनुमति प्रदान की है जिनको ये ठेकेदार विभाग में घोषित करेंगे। ऐसे में यदि किसी विभाग में पंजीकृत वस्तुओं के अलावा किसी अन्य वस्तु की सप्लाई की जाती है तो ठेकेदारों के खिलाफ नोटिस जारी हो जाता है। पिछले एक वर्ष के दौरान जनरल ऑर्डर सप्लाई फर्मों के खिलाफ 10 हजार से भी अधिक नोटिस खंड अधिकारियों ने जारी की है। इसमें सबसे अधिक नोटिस गोमती नगर, इंदिरा नगर और अलीगंज के खंड अधिकारियों ने जारी की है।
व्यापारी लगा रहे हैं विभाग के चक्कर
एक फर्म ने एक सरकारी विभाग में सप्लाई की जाने वाली पंजीकृत वस्तुओं के साथ ही विभाग की मांग पर मात्र दो ताले जिसकी कीमत 200 रुपए के करीब थी सप्लाई कर दिए और इसे रिटर्न में घोषित करते हुए ताले पर लगने वाला कर भी जमा कर दिया। फिर भी खंड अधिकारी ने नोटिस जारी कर दिया तब से यह कारोबारी विभाग के चक्कर लगा रहा है। इसी तरह के नोटिस जारी होने के दर्जनों मामले रोज वाणिज्य कर के मंडल कार्यालय में आ रहे हैं। सप्लाई फर्मों के संचालकों का कहना है कि जैसे पहले जनरल आइटम सप्लाई की व्यवस्था थी उसे ही लागू किया जाना चाहिए।
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