ओबरा बिजली उत्पादन गृह की फाइल फोटो
लखनऊ. भीषण बिजली संकट से निपटने के लिए मंगलवार को मुख्यमंत्री ने बिजली अधिकारियों के साथ मैराथन मीटिंग की थी, लेकिन नतीजा बेहतर होने के बजाय और बुरा हो गया। बुधवार दोपहर ओबरा बिजली उत्पादन गृह के ट्रांसमिशन लाइन ट्रिप कर गई। इसके बाद रात आठ बजे तक उत्पादन ठप हो गया। प्रदेश को सामान्य से पांच सौ मेगावाट बिजली का और संकट उत्पन्न हो गया। इसके कारण समूचे प्रदेश में भीषण बिजली कटौती की गई।
बताते चलें कि प्रदेश में बिजली की किल्लत बढ़ती जा रही है। संकट का सबसे ज़्यादा असर ग्रामीण इलाकों पर पड़ रहा है। सूबे की ग्रामीण आबादी पूरी तरह ब्लैकआउट की चपेट में है। गांवों से लेकर तहसील तक दिन में चार घंटे भी बिजली नहीं मिल पा रही है। इस बीच बुधवार को समूचा ओबरा बिजली उत्पादन गृह ठप हो गया। अधिकारियों का कहना है कि बिजली ट्रांस्मिट (सप्लाई) करने वाली लाइन ट्रिप होने की वजह से उत्पादन बंद करना पड़ गया।
मांग और आपूर्ति के बीच करीब चार हजार मेगावाट का अंतर
इसके बाद शाम तक प्रदेश को सिर्फ दो हज़ार मेगावाट बिजली ही मिल सकी। ऐसे में प्रदेश में बिजली की उपलब्धता साढ़े आठ हज़ार मेगावाट पर सिमट गई। इसके चलते मांग और आपूर्ति के बीच करीब चार हज़ार मेगावाट का अब तक का सबसे ज्यादा गैप आ गया। इस गैप को बैलेंस करने के लिए जिला से लेकर सभी महानगरों में जमकर अघोषित बिजली कटौती हुई। वीआईपी महानगरों में भी नौ घंटे तक की अघोषित कटौती की गई।
दर्जनों जिलों में पांच से 10 घंटे की अघोषित कटौती
वहीं, प्रदेश को केंद्र से 5005 मेगावाट बिजली मिलनी है, लेकिन 3500 मेगावाट बिजली ही मिल पाई। इसके चलते लखनऊ मंडल के सभी शहरों के साथ ही रायबरेली, अमेठी, कानपुर, इटावा, फतेहपुर, बांदा, झांसी, मथुरा, आगरा, गोरखपुर, वाराणसी, मेरठ, बस्ती, आजमगढ़, रामपुर, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, बागपत और बदायूं में पांच घंटे से लेकर 10 घंटे तक की अघोषित कटौती की गई।
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